यशवंत राठौर
07 September, 2025
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मनासा। विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में इस साल सोयाबीन की फसल पीला मोजैक बीमारी और असमय बारिश की मार से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। हालात यह हैं कि किसानों के खेतों में हरी-भरी लहलहाती फसल के बजाय पीले पत्तों से सूखते पौधे नजर आ रहे हैं। ऐसे में किसानों की उम्मीदें अब केवल सरकार और फसल बीमा पर टिकी हुई हैं।
बीते दिनों मनासा क्षेत्र के दर्जनों गाँवों व पंचायतों के किसानों ने विधायक अनिरुद्ध मारू और एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सर्वे कर मुआवजे की घोषणा नहीं की गई तो आगामी रबी सीजन की तैयारी भी संकट में पड़ जाएगी।
किसानों की पीड़ा
ग्रामीण अंचलों से मिल रही जानकारी के अनुसार, बुवाई के एक महीने बाद से ही अलग-अलग क्षेत्रों में पिला मोजैक का असर शुरू हो गया था। किसान फसल बचाने में असमर्थ रहे और अब असमय वर्षा ने बची-खुची उम्मीद भी खत्म कर दी है। छोटे कास्तकार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं क्योंकि उनके पास बीमा कराने की सुविधा नहीं होती।
इस तरह तय किया जाएगा फसल बीमा
बीमा कंपनी के जिला प्रतिनिधि जितेंद्र सिंह ने बताया कि फसल बीमा की राशि चार स्तरों पर तय की जाती है – बुवाई के 15 दिन बाद, 50 दिन पर, परिपक्वता के समय और कटाई के समय। इस वर्ष जिले में व्यापक नुकसान के कारण कंपनी का काम तीसरे स्तर पर चल रहा है।
सोयाबीन का बीमा प्रति हेक्टेयर- ₹54,000
मक्का का - ₹36,000
मूंग-उड़द का लगभग - ₹30,000 निर्धारित है।
हालांकि उन्होंने साफ किया कि सभी किसानों का बीमा नहीं होता, केवल वे ही लाभान्वित होते हैं जिन्होंने बीमा कराया हो या बैंक/सोसायटी से ऋण लिया हो। खरीफ फसल पर प्रीमियम 2% और रबी फसल पर 1.5% लिया जाता है।
राजस्व विभाग की प्रक्रिया
हल्का पटवारी मुकेश पाटीदार ने बताया कि CLR रिकॉर्ड से तय सर्वे नंबरों पर कटाई प्रयोग (कटाई परीक्षण) किया जाता है। इसमें 5x5 मीटर क्षेत्र की फसल काटकर उसका वजन कर पूरे क्षेत्र का औसत अनुमान लगाया जाता है। पिछले पाँच सालों का रिकॉर्ड भी आधार बनता है।
प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का रुख
एसडीएम किरण आंजना ने कहा कि राजस्व और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) की संयुक्त टीम सर्वे कर रही है। निर्णय रिपोर्ट आने के बाद लिया जाएगा।
विधायक अनिरुद्ध मारू ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री व कलेक्टर नीमच को पत्र लिखकर सर्वे को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सर्वे और राहत कार्य नहीं हुए तो किसानों की आर्थिक स्थिति और गंभीर हो जाएगी।
मनासा अंचल के किसान फिलहाल अपनी बर्बाद फसल के बीच सरकार की राहत और मुआवजे की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।