डेस्क न्यूज़
01 April, 2026
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नीमच। निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के विरोध में पालक संघ जिला इकाई एवं महिला विंग जिला इकाई नीमच ने बुधवार 1 अप्रैल को कलेक्टर परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान संघ के पदाधिकारियों ने नारेबाजी करते हुए डिप्टी कलेक्टर पराग जैन को कलेक्टर के नाम 9 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन का वाचन पालक संघ के जिला अध्यक्ष जगदीश शर्मा द्वारा किया गया। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता किशोर जेवरिया, बालकृष्ण सोलंकी, कपिल शुक्ला, नागेश जोगणिया, सतीश शर्मा सहित महिला विंग की पदाधिकारी आशा सांभर, उषा मित्तल, मंजु जोगनिया, श्वेता शर्मा (एडवोकेट) तथा स्कूली बच्चे भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
संघ द्वारा ज्ञापन की एक अतिरिक्त प्रति कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के नाम बंद लिफाफे में भी सौंपी गई।
मुख्य मांगें और मुद्दे
महिला विंग की जिला मीडिया प्रभारी आशा सांभर ने बताया कि ज्ञापन में छात्रों और अभिभावकों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं।
निजी स्कूलों में स्कूल बैग पॉलिसी 2020 का पालन सुनिश्चित किया जाए, जिससे बच्चों पर अनावश्यक बोझ कम हो।
प्राइवेट पब्लिशर्स की मिलीभगत से लागू की जा रही महंगी किताबों पर रोक लगाई जाए।
केवल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया जाए, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक दबाव कम हो।
सीएम राइज स्कूल निर्माण को लेकर नाराजगी
ज्ञापन में विशेष रूप से सीएम राइज सांदीपनि विद्यालय के भवन निर्माण कार्य को लेकर नाराजगी जताई गई। संघ का कहना है कि 4 वर्ष पूर्व लगभग ₹40 करोड़ की लागत से स्वीकृत यह परियोजना अब तक शुरू नहीं हो सकी, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
पालक संघ ने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की होगी।
निजी स्कूलों की जांच की मांग
संघ ने जिले के निजी विद्यालयों में निम्न सुविधाओं की जांच कराने की मांग की:
पर्याप्त कक्षाएं
खेल मैदान
पुस्तकालय और प्रयोगशाला
कंप्यूटर कक्ष
शौचालय और स्वच्छ पेयजल
इसके साथ ही यह भी मांग की गई कि फीस विनियमन नियम 2020 एवं सीबीएसई उपनियम 2018 के तहत स्कूलों की जांच कराई जाए और यदि मनमानी फीस वसूली पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाए।
पालक संघ की मांग—पारदर्शिता और कार्रवाई
पालक संघ ने प्रशासन से आग्रह किया कि जांच के बाद की गई कार्रवाई की बिंदुवार जानकारी संघ को उपलब्ध कराई जाए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।