डेस्क न्यूज़
09 April, 2026
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नीमच। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा गुरुवार को नीमच स्थित कैंपस में शौर्य दिवस पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया। यह दिन भारतीय वीरता और अदम्य साहस का प्रतीक है, जब 9 अप्रैल 1965 को ‘ऑपरेशन डेजर्ट हॉक’ के तहत पाकिस्तान की सेना ने गुजरात के रण ऑफ कच्छ क्षेत्र में भारतीय सीमा पर हमला किया था।
उस समय सीआरपीएफ की द्वितीय बटालियन की मात्र दो कंपनियां सरदार और टॉक पोस्ट पर तैनात थीं। अल सुबह करीब 3:30 बजे पाकिस्तानी सेना की पूरी ब्रिगेड ने भारी सैन्य ताकत के साथ हमला किया, लेकिन संख्या और संसाधनों में कम होने के बावजूद भारतीय जवानों ने करीब 12 घंटे तक डटकर मुकाबला किया।
इस भीषण संघर्ष में सीआरपीएफ के जांबाजों ने दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इस युद्ध में पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए और 4 को जीवित पकड़ा गया, जबकि देश की रक्षा करते हुए सीआरपीएफ के 7 जवान वीरगति को प्राप्त हुए। यही कारण है कि यह दिन हर साल शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नीमच के सीआरपीएफ कैंपस स्थित त्रिगंजा शौर्य स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में कमांडेंट प्रमोद कुमार साहू, आरटीसी के कमांडेंट छुट्टन ठाकुर, सीटीसी के कमांडेंट जितेंद्र कुमार गुप्ता, 4 सिग्नल बटालियन के कमांडेंट हरबिंदर सिंह और डॉ. संस्तृति शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जवान मौजूद रहे। सभी ने अमर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर नमन किया।
क्वार्टर गार्ड पर ‘रण ऑफ कच्छ’ से लाई गई पवित्र माटी से भरे कलश पर माल्यार्पण कर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
शौर्य दिवस के अवसर पर ग्रुप सेंटर नीमच के मेंस क्लब में विशेष सैनिक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें इस दिन के इतिहास और महत्व पर प्रकाश डाला गया। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 कार्मिकों को डीजी डिस्क और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सीआरपीएफ कैंपस में ‘बड़ा खाना’ का आयोजन किया गया, जहां अधिकारियों और जवानों ने एक साथ भोजन कर एकता और भाईचारे का संदेश दिया।