तबरेज अगवान
05 April, 2026
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नीमच। भाजपा के “तपोभूमि” जिला कार्यालय के भूमिपूजन से पहले ही सियासत ने ऐसा मोड़ लिया कि कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा अब निमंत्रण कार्ड की हो रही है। मामला अब नीमच से निकलकर भोपाल तक गूंज रहा है और वजह है - पार्टी के भीतर खुलकर सामने आई अंतरकलह।
प्रदेश के 18 जिलों में एक साथ भाजपा कार्यालयों का भूमिपूजन होना है, लेकिन चर्चा में सिर्फ नीमच है। वजह साफ है यहां जारी निमंत्रण पत्र ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल—जिस नगर पालिका परिषद ने जमीन आवंटित की, उसी की अध्यक्ष और हाल ही में प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट बनीं स्वाति गौरव चोपड़ा का नाम निमंत्रण पत्र से पूरी तरह गायब है।
वहीं दूसरी ओर, पूर्व जिलाध्यक्ष और वर्तमान ओबीसी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार, जिनके कार्यकाल में इस कार्यालय की जमीन मिली, उन्हें भी निमंत्रण से बाहर रखा गया।
नाम हटते ही सियासत भड़क गई। दोनों नेताओं के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर खुलकर मोर्चा खोल दिया है और सवाल दागे जा रहे हैं।
आखिर किसे साधा जा रहा है और किसे किनारे किया जा रहा है?
लेकिन असली दिलचस्प मोड़ तो यहां है...
इस पूरे कार्यक्रम में “मेज़बान ही मेहमान” बनकर रह गया है।
जिलाध्यक्ष होने के नाते वंदना खंडेलवाल आयोजक है लेकिन निमंत्रण कार्ड में वही विशेष अतिथि भी नज़र आ रही है — इसके अलावा तीनों विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष भी...अतिथि दर्शाए गए है।
अब सवाल उठता है—जब मेज़बान ही मेहमान बन जाए… तो असली किरदार कहा जाए?
इधर, प्रदेश के अन्य जिलों के निमंत्रण पत्र भी तुलना में सामने आए हैं।
ग्वालियर में जहां सभी बड़े नेताओं के नाम हैं, वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जगह नहीं मिली।
वहीं बुरहानपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर महापौर तक सभी को शामिल किया गया है।
ऐसे में नीमच का मामला और गहराता जा रहा है—
क्या यहां जानबूझकर नाम हटाए गए… या फिर यह सिर्फ एक “संगठनात्मक प्रयोग” है?
हालांकि, जब इस पूरे विवाद पर जिलाध्यक्ष वंदना खंडेलवाल से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा —
निमंत्रण पत्र हाईकमान के निर्देश अनुसार तैयार हुआ है, इसमें स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं किया गया।
लेकिन अंदरखाने की खबर कुछ और ही कहानी कह रही है।
सूत्रों के मुताबिक, नाराजगी इतनी गहरी है कि पवन पाटीदार और स्वाति चोपड़ा दोनों ही इस कार्यक्रम से दूरी बना सकते हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा यह “निमंत्रण विवाद” यहीं थमता है…
या फिर भाजपा की अंदरूनी राजनीति का बड़ा विस्फोट बनता है।