डेस्क न्यूज
17 February, 2026
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नीमच। शहर में बकाया प्रॉपर्टी लोन के मामले में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने SARFAESI Act, 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए दो दुकानों पर भौतिक कब्जा (Physical Possession) ले लिया। यह कार्रवाई न्यायालय के निर्देश पर पुलिस बल की मौजूदगी में की गई।
50-50 लाख का लोन, कुल 1 करोड़ बकाया
जानकारी के अनुसार, एलआईसी कार्यालय गेट के सामने स्थित एक मल्टी के प्रथम तल पर बनी दो दुकानों पर क्रमशः जगदीश चंद्र रामचंद्र बेरवा और शिव शक्ति पात्र भंडार के नाम से 50-50 लाख रुपये का प्रॉपर्टी लोन स्वीकृत किया गया था। इस प्रकार कुल एक करोड़ रुपये की राशि बकाया थी।
बैंक के पोर्टफोलियो कलेक्शन मैनेजर विवेक चौहान ने बताया कि उधारकर्ताओं को समय-समय पर नोटिस भेजे गए और व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर भुगतान का आग्रह किया गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
SARFAESI Act के तहत प्रक्रिया
बैंक अधिकारियों के अनुसार, SARFAESI Act, 2002 की धारा 13(2) के अंतर्गत 60 दिन का मांग नोटिस जारी किया गया था। नियत अवधि में भुगतान नहीं होने पर धारा 13(4) के तहत संपत्ति पर कब्जा लेने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
नियम 8(1) के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा पहले प्रतीकात्मक कब्जा लिया गया और संपत्ति पर नोटिस चस्पा किए गए। नोटिस में स्पष्ट किया गया कि संपत्ति पर बैंक का प्रथम भार है तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या अनाधिकृत प्रवेश पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ताले तोड़कर लिया भौतिक कब्जा
नोटिस अवधि पूर्ण होने और भुगतान या आपत्ति प्राप्त न होने पर न्यायालय के आदेश से दोनों दुकानों के ताले तोड़कर भौतिक कब्जा लिया गया। कार्रवाई के दौरान बैंक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। सूचना फैलते ही मौके पर भीड़ जमा हो गई और क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया।
अब होगी सार्वजनिक नीलामी
बैंक अधिकारियों ने बताया कि अब वैधानिक प्रक्रिया के तहत संपत्ति का मूल्यांकन कराया जाएगा और सार्वजनिक नीलामी की जाएगी। नीलामी से प्राप्त राशि से बैंक अपना बकाया वसूल करेगा। यदि राशि अधिक हुई तो शेष धनराशि उधारकर्ता को लौटाई जाएगी, जबकि कम होने की स्थिति में शेष वसूली के लिए अन्य कानूनी उपाय किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि SARFAESI Act के तहत बैंक लंबी अदालती प्रक्रिया के बिना बंधक संपत्ति पर कार्रवाई कर सकता है, बशर्ते सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया हो। यह कार्रवाई उन उधारकर्ताओं के लिए चेतावनी मानी जा रही है जो नोटिस मिलने के बावजूद ऋण भुगतान में लापरवाही बरतते हैं।