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मंदिर प्रांगण से उठा राष्ट्रधर्म का स्वर: जिनागम ने बताया—संविधान सिर्फ़ किताब नहीं, आचरण है

डेस्क न्यूज़ 27 January, 2026 अन्य

नीमच। जब गणतंत्र दिवस औपचारिकताओं तक सिमटने लगा हो, तब दिगंबर जैन सोशल ग्रुप ‘जिनागम’ ने यह साफ़ संदेश दिया कि राष्ट्रभक्ति मंचों की मोहताज नहीं होती, वह संस्कारों से जन्म लेती है।
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में 77वें गणतंत्र दिवस का आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि संविधान, संस्कृति और सामूहिक जिम्मेदारी का जीवंत घोष बन गया।
प्रातः 10 बजे जैसे ही मंगलाचरण की स्वर-लहरियां गूंजीं, वातावरण राष्ट्रभाव से भर उठा। सुनीता विनायका, रितु अग्रवाल और श्वेता सोनी द्वारा किए गए मंगलाचरण ने यह संदेश दिया कि धर्म और राष्ट्र अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।

देशभक्ति गीतों से जागा चेतन नागरिक का भाव

इसके बाद ईना अजमेरा, गौरी विनायका और प्रियंका विनायका ने देशभक्ति गीत
“धरती सुनहरी, अंबर नीला, ऐसा देश है मेरा”
प्रस्तुत कर उपस्थितजनों को भावविभोर कर दिया। गीतों के स्वर सिर्फ़ मनोरंजन नहीं थे, बल्कि संविधान के प्रति भावनात्मक प्रतिबद्धता की गूंज थे।

सिर्फ ध्वजारोहण नहीं, संविधान के प्रति संकल्प

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रेमबाई विनायका एवं समाज अध्यक्ष विजय विनायका द्वारा ध्वजारोहण किया गया। तिरंगे के फहराते ही समूचे परिसर में राष्ट्रगान की गर्जना गूंजी और हर हाथ में लहराता तिरंगा यह संदेश दे गया कि गणतंत्र सिर्फ़ सत्ता की व्यवस्था नहीं, नागरिकों का दायित्व है।

जिनागम का स्पष्ट संदेश

ग्रुप अध्यक्ष मनोज विनायका और सचिव अमन विनायका ने कहा कि गणतंत्र दिवस मनाने का उद्देश्य सिर्फ़ उत्सव नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को संविधान, अनुशासन और सामाजिक समरसता के मूल्यों से जोड़ना है।
कार्यक्रम का संचालन मयंक कासलीवाल ने प्रभावी ढंग से किया, वहीं आभार प्रदर्शन सचिव अमन विनायका द्वारा किया गया।

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