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श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा भारतीय संस्कृति की संवाहक- पं.रमाकांत गोस्वामी

डेस्क न्यूज 23 December, 2025 अन्य

नीमच। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा श्रवण करने से सनातन संस्कृति का ज्ञान मिलता है। भारतीय पुरातन संस्कृति जिसने पूरे विश्व को मार्ग दिखाया है उसकी जानकारी मिलती है। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा के श्रवण करने से मनुष्य को कल्याण का मार्ग मिलता है और प्रेत आत्मा का मोक्ष हो जाता है। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा भारतीय संस्कृति की संवाहक हैं। यह बात पंडित रमाकांत गोस्वामी महाराज ने कही, वे चौकन्ना बालाजी के समीप कमल अग्रसेन भवन सभागार में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा के द्वितीय दिवस बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा पाप कर्मों से हमें दूर करती है और पुण्य कर्मों की और अग्रसर करती है। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा का निरंतर वाचन करने से आत्म कल्याण  का मार्ग मिलता है और आत्मा को शांति मिलती है। आधुनिक युग में व्यक्ति धन कमाने के अंधी दौड़ में अपने जीवन को तनाव की ओर अग्रसर कर रहा है ,ऐसे में श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा श्रवण करें तो हमारा तनाव भी दूर होता है और आत्मा को शांति भी मिलती है। भागवत मोक्ष का मार्ग दिखाती है। 
उन्होंने कहा कि भारत वर्श में जन्म लेने वाले भारतवंशी कहलाते हैं। हर हिन्दू के घर में श्रीमद् भागवत होनी चाहिए। हमारे घर में जो भी भगवान विराजमान हों, हमें भगवान के सामने बैठकर कथा सुनानी चाहिए। ठाकुरजी के सामने बैठकर कथा सुनाएंगे तो ठाकुरजी कृपा बरसाएंगे। जहां कथा हो रही है वहीं तो आनंद आता है। हमें कीर्तन करना चाहिए। कीर्तन करते करते भोजन बनाना चाहिए। हमारी बुद्धि का उद्धार होगा। जितना भगवान का नाम लेंगे। शर्म केवल फिल्मी गानों के सुनने में आनी चाहिए। ठाकुरजी के बारे में बात करेंगे तो ठाकुरजी की कृपा बनी रहेगी। आसन ठाकुरजी के सामने लगाना चाहिए। ठाकुरजी के सामने बैठने से सद्बुद्धि प्राप्त होती है। हर सांस पर भगवान का नाम लेना चाहिए। शरीर में सबसे कीमती श्वांस है, जो बहुत मुश्किल से मिलती है। अपनी इन्द्रियों को सुनना चाहिए और इन्द्रियों को जीतना चाहिए। जितने भी  नदी पहाड हैं, यह भगवान की आत्मा हैं। पानी में हवन सामग्री नहीं डालनी चाहिए। जल ही जीवन है। भगवान की चाबी धर्म है। कभी भी भगवान को पीछे से प्रणाम नहीं करना चाहिए। पीछे से प्रणम करने वाला अधर्मी होता है। भगवान की कथा सुननी चाहिए। हमारे धर्म में 36 करोड देवी देवता हैं। हमें सभी भगवान की सेवा करनी चाहिए। इतने भगवान हमारे धर्म में है और किसी के पास नहीं है। सनातन धर्म में झूठ का कोई काम नही है। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।

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