ताजासमाचार

‘बैंबू मैन’ कमलाशंकर विश्वकर्मा को राष्ट्रीय सम्मान : पुनर्योजी कृषि में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला “प्रोफेसर रतनलाल अवॉर्ड – 2025

डेस्क न्यूज 06 December, 2025 अन्य

भोपाल/नीमच। पुनर्योजी कृषि और मिट्टी की सेहत सुधारने के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले नीमच जिले के ग्राम भाटखेड़ी के प्रगतिशील किसान कमलाशंकर विश्वकर्मा, जिन्हें क्षेत्र में प्यार से ‘बैंबू मैन’ कहा जाता है, को राष्ट्रीय स्तर के “प्रोफेसर रतनलाल अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन रिजनरेटिव एग्रीकल्चर – 2025” से सम्मानित किया गया है।
यह प्रतिष्ठित सम्मान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सॉइल साइंस, भोपाल, एवं अंतरराष्ट्रीय संस्था सॉलिडैरिडाड द्वारा “विश्व मृदा दिवस” के अवसर पर प्रदान किया गया। विश्वकर्मा को यह अवॉर्ड फार्मर (इंडिविजुअल) श्रेणी में दिया गया है।
कमलाशंकर विश्वकर्मा ने अपने खेतों में फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, जैविक खाद, तथा बड़े स्तर पर बांस आधारित खेती को अपनाकर मिट्टी में कार्बन बढ़ाने और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
उनका बांस आधारित खेती–उद्यम ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका का सफल मॉडल माना जा रहा है।
पुरस्कार वितरण समारोह 5 दिसंबर 2025 को भोपाल के होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में आयोजित हुआ, जहां देशभर से चुने गए 14 किसान और विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया।
पूर्व कृषि वैज्ञानिक और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. एम. एच. मेहता, राष्ट्रीय मृदा विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. मनोरंजन मोहंती, डॉ. शताद्रु चट्टोपाध्याय एवं डॉ. सुरेश मोटवानी द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि कमलाशंकर विश्वकर्मा जैसी प्रेरक हस्तियाँ ही आने वाली पीढ़ी को टिकाऊ व पुनर्योजी कृषि का रास्ता दिखा रही हैं—जहाँ मिट्टी, पर्यावरण और किसान की आय, तीनों सुरक्षित रहती हैं।

Related Post