डेस्क न्यूज़
26 May, 2026
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नीमच। जिले की जनसुनवाई में सौंपे गए एक नागरिकता त्याग आवेदन ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कार्रवाई में देरी से नाराज होकर आम नागरिक पंकज तिवारी द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए “नागरिकता हस्तांतरण एवं नागरिकता त्यागपत्र” की गूंज अब भोपाल तक पहुंच गई है। मामले को लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर नीमच प्रशासन और शासन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में सौंपे गए आवेदन में पंकज तिवारी ने खुद को भारतीय नागरिक बताते हुए लिखा कि वे संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत सांकेतिक विरोध स्वरूप अपनी नागरिकता त्यागने और हस्तांतरित करने का आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं। आवेदन में आरोप लगाया गया कि लोकायुक्त कार्रवाई में रंगे हाथों पकड़े गए जनपद जावद अध्यक्ष गोपाल चारण के खिलाफ अब तक कठोर कार्रवाई नहीं हुई है। साथ ही थड़ोद पंचायत में शासकीय राशि गबन और आर्थिक अनियमितताओं के मामलों में भी संबंधित सरपंच एवं सचिव पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जनता का लोकतंत्र और प्रशासन से भरोसा कमजोर हो रहा है।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई लंबित रहना शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। आवेदक ने मांग की कि जनपद अध्यक्ष को तत्काल पद से हटाया जाए तथा संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाए।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि “नागरिकता से त्यागपत्र गांधीवादी तरीके का एक सांकेतिक विरोध है। यह जन की सुनवाई कहां हो रही है? होता तो सरकारी राशि के गबन करने वाले भ्रष्ट सचिव पर एफआईआर दर्ज होने के बाद वर्षों क्यों लगते ? जनपद अध्यक्ष को हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है ?”
पूर्व मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी लोग प्रशासनिक कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने नीमच प्रशासन की कार्यशैली पर भी कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।