डेस्क न्यूज़
01 October, 2025
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नीमच। शारदीय नवरात्रि की महानवमी के पावन अवसर पर नीमच जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री गुर्जरखेड़ा धाम, जावी में परंपरानुसार पाती विसर्जन और छमाही भविष्यवाणी का आयोजन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। सुबह से ही मंदिर में मां नवदुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना, हवन, कन्या पूजन और महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
पूजन कार्य पंडित घनश्याम शास्त्री (त्रिवेदी), पालसोड़ा द्वारा संपन्न किया गया। इसके पश्चात पंडित घनश्याम लौहार पर श्री गुर्जरखेड़ा सरकार की दिव्य उपस्थिति हुई। परिक्रमा और नागबामी पूजन के उपरांत परंपरानुसार जलकुंभ में पाती विसर्जन कर भविष्यवाणी सुनाई गई, जिसे श्रद्धालुओं ने पूरे विश्वास और ध्यानपूर्वक सुना।
भविष्यवाणी के अनुसार, आने वाले 10 से 15 दिनों तक और बारिश की संभावना है। इस अवधि में तीन मावठे, दो पाला और दो ओलावृष्टि हो सकती हैं। पहली ओलावृष्टि में छोटे ओले और दूसरी में बड़े ओले गिरेंगे, जिससे कुछ नुकसान की आशंका जताई गई है। हालांकि गेहूं, अलसी, रायड़ा और चना की पैदावार अच्छी रहने की बात कही गई, लेकिन पाले से आंशिक हानि हो सकती है। लहसुन का उत्पादन कुछ क्षेत्रों में 75 प्रतिशत तक और कुछ में 50 प्रतिशत तक रहेगा, जबकि मेथी में पौधे सूखने का रोग आ सकता है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में देववाणी में कहा गया कि आने वाले छह माह में कोई बड़ी बीमारी या विकराल समस्या नहीं होगी, केवल सामान्य मौसमी बीमारियां चलेंगी। राजनीतिक क्षेत्र में खींचतान और उठापटक बनी रहेगी। साथ ही दुर्घटनाएं अधिक होने की चेतावनी दी गई, इसलिए वाहन सावधानीपूर्वक चलाने की सलाह दी गई।
कृषि उत्पादों के भावों को लेकर भी भविष्यवाणी की गई। सोयाबीन के भाव ₹4500 से ₹5300, लहसुन दीपावली के आसपास ₹7000 से ₹11500, प्याज ₹1200 से ₹2000, चना ₹5500 से ₹6500, डॉलर चना ₹8000 से ₹10500, धनिया ₹7000 से ₹9500, गेहूं ₹2600 से ₹3400, मक्का ₹1800 से ₹2200, मसूर ₹6500 से ₹7000, अलसी ₹7000 से ₹8000 और मूंग के भाव ₹6500 से ₹7000 तक बताए गए। इसके अलावा सोना-चांदी में वृद्धि की संभावना भी व्यक्त की गई।
देववाणी में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह एक आसरा मात्र है, सभी को अपनी बुद्धि और विवेक से निर्णय लेना चाहिए। साथ ही धर्म और कर्म पर चलने, माता-पिता और गौमाता की सेवा करने, साधु-संतों का सम्मान करने और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
उक्त जानकारी श्री गुर्जरखेड़ा धाम मंदिर समिति के संरक्षक एवं प्रवक्ता दिलीप पाटीदार, जावी द्वारा साझा की गई। यह आयोजन जहां एक ओर गहरी धार्मिक आस्था का प्रतीक है, वहीं समाज और कृषि क्षेत्र के लिए मार्गदर्शन एवं चेतना का भी स्रोत बना हुआ है।