डेस्क न्यूज़
03 May, 2026
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भोपाल/नीमच। अपनी बेबाक शैली और सोशल मीडिया पर सक्रियता के लिए चर्चित रहने वाली लक्ष्मी गामड़ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। नीमच की पूर्व अपर कलेक्टर और वर्तमान में भोपाल स्थित एमपी गवर्नमेंट प्रेस की नियंत्रक गामड़ ने इस बार ऐसा पोस्ट किया कि देखते ही देखते इंटरनेट पर तहलका मच गया।
फेसबुक पर उन्होंने लिखा—“आवश्यकता है एक असिस्टेंट की, जो मेरी तरह जब भी जरूरत लगे, सामने वाले को जाकर दो चमाट रसीद कर सके… वेकेंसी ओपन, योग्यता मिलकर बताई जाएगी।” बस फिर क्या था, पोस्ट वायरल हुई और कमेंट्स की बाढ़ आ गई। किसी ने इसे दबंग अंदाज बताया तो कुछ ने मर्यादा का हवाला देते हुए सवाल उठाए।
लेकिन असली कहानी तब सामने आई, जब गामड़ ने खुद दूसरी पोस्ट कर पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने एक व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें एक शख्स उन्हें “आई लव यू” जैसे कई मैसेज लिखकर प्रपोज करता नजर आया।
यहीं से “चमाट” पोस्ट का असली एंगल सामने आया। गामड़ ने साफ शब्दों में लिखा कि यह पोस्ट किसी मजाक के लिए नहीं, बल्कि ऐसे मनचलों को करारा संदेश देने के लिए थी। उन्होंने सवाल उठाया—क्या महिला अधिकारी होने के कारण अपने सम्मान के लिए आवाज उठाना गलत है?
अपने अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि चुप रहने से लोग आपको कमजोर समझ लेते हैं और गलत लोगों का हौसला बढ़ता है। “ये स्क्रीनशॉट उन लोगों के लिए है जो मेरे चमाट से बिलबिला गए थे”—इस लाइन ने पूरे मामले को और ज्यादा चर्चाओं में ला दिया।
सवालों के घेरे में “चमाट” पोस्ट
क्या एक महिला अधिकारी को सोशल मीडिया पर इस तरह की भाषा इस्तेमाल करनी चाहिए, छेड़छाड़ के मामले में कानूनी कार्रवाई ज्यादा जरूरी है या सार्वजनिक प्रतिक्रिया, क्या इस तरह की पोस्ट समाज को गलत संदेश देती है, जिम्मेदार पद पर बैठे अफसरों की अभिव्यक्ति की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या सख्त संदेश देने के लिए ऐसा तरीका सही है ?
बढ़ती गुस्ताखी या कानून का डर खत्म ?
क्या मनचले इतने बेखौफ हो गए हैं कि अब महिला अधिकारियों तक को प्रपोज कर परेशान करने से भी नहीं डर रहे, क्या यह कानून व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाता, क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जरूरत नहीं है और क्या समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय नहीं बनता ? आखिर मनचलों के हौसले बुलंद क्यों हैं और इन्हें रोकने के लिए क्या कड़े कदम जरूरी हैं?