न्यूज डेस्क
04 April, 2026
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मंदसौर | मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के गरोठ कस्बे से एक बेहद भावुक और दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक साधारण परिवार की महज दो माह की मासूम बच्ची सृष्टि सोनी दुर्लभ और जानलेवा बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से जूझ रही है। इस गंभीर बीमारी के इलाज के लिए जिस Zolgensma इंजेक्शन की जरूरत है, उसकी कीमत करीब 9 करोड़ 40 लाख रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी राशि इस गरीब परिवार के लिए असंभव है, जिसके चलते अब उन्होंने देश के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है।
गरोठ की गुप्तेश्वर कॉलोनी में रहने वाले गौरव सोनी एक छोटे स्तर पर साइकिल और मोटरसाइकिल पंचर बनाने का काम करते हैं। उनके पिता अनिल सोनी भी इसी काम में उनका साथ देते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण है और रोज कमाने-खाने पर ही जीवन निर्भर है। ऐसे में जब तीन साल की लंबी प्रतीक्षा और मन्नतों के बाद जनवरी 2026 में उनके घर बेटी का जन्म हुआ, तो परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गई।
परिवार ने इस बेटी को मां दुधाखेड़ी धाम (मां दुर्गा खेड़ी) की कृपा माना। गौरव और उनकी पत्नी पूजा ने संतान प्राप्ति के लिए यहां मन्नत मांगी थी, जो पूरी होने पर उन्होंने इसे ईश्वर का आशीर्वाद समझा। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकी।
जन्म के कुछ ही सप्ताह बाद बच्ची में असामान्य लक्षण दिखाई देने लगे। सृष्टि को सांस लेने में परेशानी होने लगी, उसके हाथ-पैर ढीले रहने लगे और वह सामान्य बच्चों की तरह प्रतिक्रिया नहीं दे पा रही थी। परिवार चिंतित हो उठा और तुरंत इलाज की तलाश शुरू की।
पहले उसे कोटा ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने बड़े सेंटर पर दिखाने की सलाह दी। इसके बाद परिवार इंदौर पहुंचा, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार बच्ची को जयपुर के प्रसिद्ध जे.के. लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज शुरू हुआ।
22 मार्च 2026 को बेंगलुरु की MedGenome Labs Limited से आई DNA जांच रिपोर्ट ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि सृष्टि को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 है, जो इस बीमारी का सबसे गंभीर रूप माना जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार SMA एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर के मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं। इससे मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और बच्चा सिर उठाने, बैठने, चलने, यहां तक कि सांस लेने जैसी बुनियादी क्रियाएं भी नहीं कर पाता। SMA टाइप-1 से पीड़ित बच्चों में यदि समय पर इलाज न हो, तो ज्यादातर बच्चे दो साल की उम्र से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
डॉक्टरों ने साफ तौर पर कहा कि इस बीमारी का एकमात्र प्रभावी इलाज Zolgensma इंजेक्शन है। यह एक जीन थेरेपी है, जिसे अमेरिका से मंगवाया जाता है और यह शरीर में खराब SMN1 जीन को सही जीन से बदलने का काम करता है। खास बात यह है कि यह एक बार लगाया जाने वाला इंजेक्शन है, लेकिन इसकी कीमत दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में शामिल है।
भारत में इस इंजेक्शन की कीमत टैक्स और अन्य खर्चों सहित 9 करोड़ से 17 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। सृष्टि के मामले में डॉक्टरों ने करीब 9 करोड़ 40 लाख रुपये का खर्च बताया है।
गौरव सोनी बताते हैं, “हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बेटी की जिंदगी बचाने के लिए इतनी बड़ी रकम की जरूरत पड़ेगी। हम दिन-रात मेहनत करके घर चलाते हैं, लेकिन यह खर्च हमारे बस से बाहर है। अब सरकार और समाज ही हमारी आखिरी उम्मीद है।”
दादा अनिल सोनी की आंखों में आंसू छलक उठते हैं। वे कहते हैं, “पोती के जन्म की खुशी अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि यह दुख सामने आ गया। सरकार बेटियों के लिए कई योजनाएं चला रही है, हमें उम्मीद है कि हमारी इस बेटी के लिए भी मदद जरूर मिलेगी।”
मां पूजा सोनी भावुक होकर कहती हैं, “तीन साल की मन्नत के बाद यह बच्ची हमारे जीवन में आई थी। अब उसे इस हालत में देखना सहन नहीं हो रहा। हम हर दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।”
परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सहायता की अपील की है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायक और सांसद को भी मदद के लिए निवेदन किया गया है।
पत्र में गौरव सोनी ने लिखा है कि वे एक गरीब परिवार से हैं और इतनी बड़ी राशि जुटाना उनके लिए असंभव है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि उनकी मासूम बच्ची की जान बचाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
SMA जैसी दुर्लभ बीमारियां दुनिया भर में हर 6,000 से 10,000 जन्मों में एक बच्चे को प्रभावित करती हैं। भारत में भी ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां महंगे इलाज के कारण परिवार असहाय हो जाते हैं। कुछ मामलों में सरकारी सहायता, NGO या क्राउडफंडिंग के जरिए बच्चों का इलाज संभव हो पाया है, लेकिन हर परिवार को यह अवसर नहीं मिल पाता।
यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और दुर्लभ बीमारियों के महंगे इलाज की सच्चाई को भी उजागर करता है। समय रहते इलाज मिलना सृष्टि की जिंदगी के लिए बेहद जरूरी है।
अब पूरे गरोठ क्षेत्र और समाज की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मासूम के लिए मदद का कोई रास्ता निकल पाएगा। परिवार को उम्मीद है कि इंसानियत के आधार पर सरकार और समाज दोनों आगे आएंगे और सृष्टि को नया जीवन मिलेगा।
संपर्क: गौरव सोनी – 8349303796 | अनिल सोनी – 9926027576