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जाजू कन्या महाविद्यालय में “मनोबल सत्र” का सफल आयोजन, छात्राओं को मिला तनाव प्रबंधन का मार्गदर्शन

डेस्क न्यूज 18 March, 2026 अन्य

नीमच। छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए जाजू कन्या महाविद्यालय में 13 मार्च से 17 मार्च 2026 तक “तनाव प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित मनोबल सत्र” का सफल आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश के निर्देशानुसार आयोजित यह कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से हुआ, जिसका प्रसारण यूट्यूब के जरिए किया गया। इसमें महाविद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राओं और स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के प्रथम दिवस (13 मार्च) पर डॉ. तनमय जोशी (सहायक प्राध्यापक, मनोरोग विभाग, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ने “शैक्षणिक एवं मानसिक तनाव से निपटने की रणनीतियाँ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने समय प्रबंधन, सकारात्मक सोच और नियमित दिनचर्या को तनाव कम करने का आधार बताया।

द्वितीय दिवस (14 मार्च) को आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा (महानिरीक्षक, महाराष्ट्र पुलिस) ने “बिना तनाव के अपने लक्ष्य को कैसे प्राप्त करें” विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने लक्ष्य निर्धारण, अनुशासन और आत्मविश्वास के महत्व पर जोर देते हुए छात्राओं को अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया।

तृतीय सत्र (16 मार्च) में सत्य साईं सेवा संगठन, मध्यप्रदेश द्वारा ध्यान (मेडिटेशन) सत्र आयोजित किया गया। इसमें छात्राओं को ध्यान, श्वास नियंत्रण और मानसिक शांति के व्यावहारिक अभ्यास कराए गए, जिससे वे जीवन में संतुलन और एकाग्रता बनाए रख सकें।

अंतिम दिवस (17 मार्च) पर डॉ. ऋतुनंदन ने “सामाजिक तनाव, जीवन कौशल एवं भावनात्मक संतुलन” विषय पर व्याख्यान देते हुए सामाजिक दबावों के बीच संतुलित जीवन जीने के महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए। उन्होंने जीवन कौशल और भावनात्मक संतुलन को सफलता की कुंजी बताया।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रतिभा कालानी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने छात्राओं को इन सत्रों से प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में उतारने और मानसिक रूप से सशक्त बनने का संदेश दिया। वहीं एनटीएफ प्रभारी डॉ. हीना हरित ने भी तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों और सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला।

पूरे आयोजन में छात्राओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही और सभी सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुए। यह पहल छात्राओं के सर्वांगीण विकास और मानसिक सुदृढ़ता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

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