डेस्क न्यूज
08 March, 2026
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नीमच। शहर के इंदिरा नगर क्षेत्र में आवारा पशुओं के आतंक और स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता से जुड़ी एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां बच्चों को बचाने के लिए आगे आए एक पिता को सांड के हमले की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
जानकारी के अनुसार इंदिरा नगर क्षेत्र में एक आवारा सांड ने अचानक बच्चों पर हमला कर दिया। बच्चों को खतरे में देख उनके पिता उन्हें बचाने के लिए दौड़े, लेकिन इसी दौरान सांड ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हमले में युवक के सिर पर गंभीर चोटें आईं और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
परिजनों का आरोप है कि घायल को पहले नीमच के सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उसे उचित उपचार नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि अस्पताल स्टाफ और एम्बुलेंस कर्मियों ने उदयपुर ले जाने पर रास्ते में अनहोनी होने का डर दिखाया और बाद में घायल को शहर के निजी ज्ञानोदय अस्पताल ले जाया गया।
परिजनों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने इलाज शुरू करने से पहले ही काउंटर पर 1.50 लाख रुपये जमा कराने का दबाव बनाया। गंभीर हालत बताकर मरीज को अस्पताल में भर्ती रखा गया। आरोप है कि मरीज को सात दिनों तक भर्ती रखकर आयुष्मान भारत योजना होने के बावजूद करीब 2 लाख रुपये वसूले गए।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि युवक की मौत रात करीब 12 बजे ही हो गई थी, जिसकी अनौपचारिक जानकारी उन्हें अस्पताल के एक कर्मचारी से मिली। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से 50 हजार रुपये जमा कराने के बाद ही सुबह करीब 7 बजे मौत की आधिकारिक सूचना दी।
मृतक के मामा हेमन्त कुमार हाड़ा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल में इलाज के नाम पर खुलेआम वसूली की गई और पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति का भी ख्याल नहीं रखा गया।
वहीं रिश्तेदार सुनील राव ने भी अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा मामला एक सिंडिकेट की तरह संचालित हो रहा है, जिसमें कई लोगों की मिलीभगत हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से ज्ञानोदय अस्पताल को तत्काल सील करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। इस मामले में तहसीलदार अजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि परिजनों की लिखित शिकायत ली जा रही है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि शहर में आवारा पशुओं पर नियंत्रण किया जाए, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए और निजी अस्पताल द्वारा लिए गए पैसे वापस दिलाए जाएं।