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चर्चित फर्जी कार सौदे के मामले मे अरोरा की याचिका ख़ारिज, फरार सुनील शर्मा की तलाश तेज

डेस्क न्यूज 13 February, 2026 अन्य

नीमच/मनासा। वाहन खरीद-फरोख्त की आड़ में रची गई कथित जालसाजी पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। मनासा न्यायालय ने बहुचर्चित वाहन धोखाधड़ी मामले में आरोपी 27 वर्षीय दानिश पुत्र राकेश अरोरा की जमानत याचिका सिरे से खारिज कर दी। साफ संदेश दिया गया की गंभीर आर्थिक अपराध में राहत आसान नहीं।

अपराध क्रमांक 39/2026 में धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120बी भादवि के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे संगीन आरोप दर्ज हैं।

फर्जी दस्तावेज, मृतक के हस्ताक्षर और लाखों की हेराफेरी

केस डायरी के मुताबिक फरियादी जगदीश रावत के दिवंगत पिता छगनलाल के नाम दर्ज एमजी हेक्टर (MP-44-CA-0006) को 6 अप्रैल 2023 को कथित रूप से फर्जी फॉर्म 29-30 के जरिए डॉ. जीवन चौहान के नाम ट्रांसफर कर बेच दिया गया। हस्तलेखा जांच में मृतक के हस्ताक्षर संदिग्ध पाए गए। फाइनेंस और ऑटो डीलर से जुड़े गवाहों ने भी कथित फर्जी सेल लेटर के आधार पर रकम हड़पने की बात कही है।
शिकायत 20 अगस्त 2025 को दर्ज हुई, गिरफ्तारी 24 जनवरी 2026 को हुई। जांच अभी जारी है। 
सहआरोपी सुनील शर्मा—जो मनासा और नीमच से जुड़ा ऑटो-डीलिंग का काम करता है—फिलहाल फरार बताया गया है। पुलिस ने सुनील को धरपकड़ की जद्दोजहद तेज़ कर दी है। 

पुराने मामलों का रिकॉर्ड भी कोर्ट के सामने

अभियोजन ने आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी रखा—आबकारी अधिनियम (162/2023), हत्या प्रयास (549/2023), जालसाजी (18/2024) और मारपीट (19/2024) के मामले लंबित बताए गए। बचाव पक्ष ने पारिवारिक संबंध और घटना पुरानी होने का तर्क दिया, लेकिन अदालत ने इसे विचारणीय विषय बताते हुए जमानत का लाभ देने से इंकार कर दिया।

अदालत का स्पष्ट संदेश

द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशुतोष यादव ने 10 फरवरी 2026 को बी.ए. 25/2026 पर आदेश सुनाते हुए धारा 483 बीएनएसएस के तहत जमानत याचिका निरस्त कर दी।
साफ है— कथित फर्जीवाड़े की परतें गहरी हैं, जांच जारी है और कानून की पकड़ फिलहाल ढीली पड़ती नजर नहीं आ रही।

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