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रामपुरा पीजी कॉलेज केस में हाईकोर्ट का अल्टीमेटम, 3 माह में स्थायीकर्मी दर्जा देने के आदेश

डेस्क न्यूज 08 February, 2026 अन्य

नीमच | उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामपुरा जिला नीमच के प्राचार्य को हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि न्यायालय के आदेश का पालन करें, अन्यथा अवमानना के गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। नियत समयावधि में स्थायीकर्मी की श्रेणी प्रदान नहीं किए जाने के मामले में हाईकोर्ट इंदौर ने दोनों अधिकारियों को तीन माह के भीतर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा दैनिक वेतनभोगियों को स्थायीकर्मी की श्रेणी प्रदान करने की योजना दिनांक 07 अक्टूबर 2016 को पूरे प्रदेश में लागू की गई थी। इस योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत पात्र दैनिक वेतनभोगियों को स्थायीकर्मी का लाभ दिया जा चुका है। इसके बावजूद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामपुरा जिला नीमच में कार्यरत रामपुरा निवासी याचिकाकर्ता रविन्द्र कुमार जैन को यह श्रेणी प्रदान नहीं की गई, जिसे उन्होंने भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताया।

इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट एडवोकेट गौरव पांचाल के माध्यम से हाईकोर्ट इंदौर में रिट याचिका दायर की गई थी, जिसमें न्यायालय ने याचिकाकर्ता को स्थायीकर्मी की श्रेणी प्रदान करने के आदेश दिए थे। इसके बाद मध्यप्रदेश शासन द्वारा उक्त आदेश के विरुद्ध रिव्यू याचिका प्रस्तुत की गई, जिसे हाईकोर्ट इंदौर ने निराकृत कर दिया और एरियर के बिना ही स्थायीकर्मी की श्रेणी देने के आदेश को बरकरार रखा।

न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद जब याचिकाकर्ता को स्थायीकर्मी की श्रेणी नहीं दी गई, तो उन्होंने अवमानना याचिका दायर की। अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गौरव पांचाल ने हाईकोर्ट के समक्ष रिट एवं रिव्यू याचिका से जुड़े सभी तथ्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि याचिकाकर्ता पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से महाविद्यालय में सेवाएं दे रहा है, इसके बावजूद उसे स्थायीकर्मी की श्रेणी से वंचित रखा गया है, जो संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।

तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका का निराकरण करते हुए उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामपुरा के प्राचार्य को तीन माह की अवधि में आदेश का पालन कर याचिकाकर्ता को स्थायीकर्मी की श्रेणी प्रदान करने के निर्देश दिए। साथ ही न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया और याचिकाकर्ता को पुनः न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, तो इसके लिए उत्तरदाता स्वयं जिम्मेदार होंगे और उनके विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है।

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