मनीष नायक
02 February, 2026
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नीमच। रविवार को अचानक बदले मौसम ने नीमच जिले के किसानों की उम्मीदों पर करारा प्रहार किया। बेमौसम बारिश और तेज ओलावृष्टि ने खेतों में लहलहाती फसलों को पल भर में तबाही में बदल दिया। आसमान से बरसी इस आफ़त ने किसानों के सपनों को इस कदर कुचला कि महीनों की मेहनत देखते ही देखते मिट्टी में मिल गई। जिले के कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई, जिससे खेत सफ़ेद चादर में ढक गए और फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं।
रविवार रात्रि को जावद क्षेत्र के मोरवन, दड़ौली, डीकेन, जनकपुर, मांडा, झिरमिर, रामनगर सहित आसपास के अनेक ग्रामीण इलाकों में तेज बारिश के साथ जमकर ओले गिरे। ओलों की मार इतनी भीषण थी कि अफीम, गेहूं, सरसों, अश्वगंधा, चिया और संतरे की खेती सहित अन्य फसलें बुरी तरह तबाह हो गईं | खेतों में खड़ी फसलें टूटकर बिछ गईं, बालियां झड़ गईं और किसान हाथ मलते रह गए।
तबाही का मंजर ऐसा था कि सुबह जब किसान खेतों में पहुंचे तो आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो गया। महीनों की मेहनत, बीज, खाद, सिंचाई और कर्ज का बोझ — सब कुछ मिट्टी में मिल चुका था। गांव-गांव में सन्नाटा पसरा है, किसानों के चेहरों पर गहरी चिंता और बेबसी साफ झलक रही है। कई किसानों का कहना है कि यह नुकसान सिर्फ़ फसल का नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के भविष्य का नुकसान है। अब उनके सामने रोज़गार, खाने-पीने और आने वाले दिनों की बड़ी चिंता खड़ी हो गई है।
किसानों का कहना है कि अब उनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान का आकलन करने और शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है, ताकि उजड़े किसानों को कुछ राहत मिल सके और वे फिर से संभल सकें।