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क्या यही है जावद का विकास ? सीएम-मंत्री के क्षेत्र में 2 किमी सड़क के लिए तड़प रहे ग्रामीण, यहाँ प्रसुताएं ट्रैक्टर-ट्रॉली में अस्पताल पहुंचती है

मनीष नायक 17 September, 2025 अन्य

नीमच। एक तरफ सरकार दावा करती है कि "मध्यप्रदेश की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं", वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व काबिना मंत्री का क्षेत्र जावद आज भी मूलभूत सड़क सुविधा के लिए तरस रहा है। जावद के बांगरेड़ गांव की हालत यह है कि यहां मात्र 2 किलोमीटर की पक्की सड़क तक नहीं बन पा रही। नतीजा — गर्भवती महिलाओं को ट्रैक्टर-ट्रॉली में लिटाकर अस्पताल ले जाया जाता है। कीचड़, गड्ढे और पगडंडियां बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं।

क्या यही है विकास का चेहरा ?
जहां नेता मंच से आधुनिक एआई एजुकेशन की उपलब्धियां गिनाते नहीं थकते, वहीं उन्ही  नेताओं का क्षेत्र सड़क जैसी बुनियादी ज़रूरत के लिए मोहताज है।
सबसे बड़ा सवाल – क्या सरकार के पास 2 किलोमीटर सड़क बनाने का भी बजट नहीं है? या फिर यहां के गरीबों की तकलीफें सिर्फ चुनावी भाषणों का हिस्सा बनकर रह गई हैं?
हर चुनाव से पहले नेता माला पहनकर, मुस्कान ओढ़कर, वोट मांगने गांव पहुंच जाते हैं।वोट मिलते ही विकास के वादे, घोषणाएं और भाषण सब ठंडे बस्ते में चला जाता है।
यह पूर्व मुख्यमंत्री स्व.वीरेन्द्र कुमार सखलेचा का क्षेत्र है जहां से पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा वर्तमान में विधायक हैं । यहाँ पिछले दिनों एआई एजुकेशन के नवाचार का सेहरा उन्होंने अपने सर बांधा, लेकिन बांगरेड़ गांव में बच्चे आज भी स्कूल जाने के लिए दलदल और कीचड़ पार करते हैं।

प्रशासन की लीपापोती :
जब पंचायत सचिव घनश्याम राठौर से सवाल किया गया तो उन्होंने ऐसे जवाब दिए जैसे उन्हें खुद ही नहीं पता कि सड़क मंजूर हुई या नहीं। कभी मंजूरी की बात, कभी खेत तक सड़क की बात। प्रशासन की यह स्थिति बताती है कि इस क्षेत्र के विकास का कोई रोड़मेप   ही नहीं है।

181 पर भी सिर्फ दिखावा:
ग्रामवासी विनोद भर्रावत बताते हैं की ग्रामीणों ने कई बार 181 पर शिकायत की। मगर अफसरों ने कागज़ों में ‘समस्या का समाधान’ दिखाकर फाइल बंद कर दी। गांव की हालत वही की वही है। अब ग्रामीण साफ कह रहे हैं —
या तो सड़क बनाओ या फिर कार्रवाई करो...वरना हम आंदोलन करेंगे!

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