डेस्क न्यूज़
13 September, 2025
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नीमच | थैलेसीमिया जैसी गंभीर और जीवनभर प्रभावित करने वाली बीमारी के प्रभावी प्रबंधन और जन-जागरूकता को लेकर नीमच में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश थैलेसीमिया जन जागृति समिति, थैलेसीमिया एंड सिकल सेल वेलफेयर सोसायटी, नीमच तथा अन्नपूर्णा सेवा न्यास के संयुक्त तत्वावधान में 13 और 14 सितंबर को टाउन हॉल, दशहरा मैदान में यह महत्वपूर्ण आयोजन हुआ।
इस सम्मेलन में देशभर से करीब 175 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे, उनके परिजन और 100 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। साथ ही, थैलेसीमिया चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े 16 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ डॉक्टर भी विशेष रूप से नीमच पहुंचे। यह सम्मेलन न केवल चिकित्सा दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक सरोकारों और जन-संवेदना की दृष्टि से भी एक ऐतिहासिक कदम रहा।
आयोजन समिति के संयोजक राकेश 'पप्पू' जैन ने बताया कि थैलेसीमिया बच्चों से उनका बचपन छीन लेता है। शरीर में रक्त निर्माण न होने के कारण मरीजों को बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है। अकेले नीमच जिले में ही 60 से 70 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे में यह सम्मेलन थैलेसीमिया के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की दिशा में उठाया गया एक सशक्त कदम है।
सम्मेलन में बच्चों व परिजनों के लिए निःशुल्क भोजन, आवास, स्वास्थ्य परीक्षण, विशेषज्ञ परामर्श, तथा एचएलए (बोन मैरो) टेस्टिंग की व्यवस्था की गई। साथ ही, बोन मैरो डोनर पंजीयन भी इस अवसर पर किया गया, जिससे भविष्य में ज़रूरतमंद बच्चों को जीवनरक्षक सहायता मिल सके।
थैलेसीमिया एवं सिकल सेल वेलफेयर सोसायटी के संरक्षक व अध्यक्ष सत्येन्द्रसिंह राठौड़ ने कहा, "थैलेसीमिया के साथ भी बेहतर जीवन जिया जा सकता है, बशर्ते समय पर निदान और उचित उपचार मिले।" इसी सोच के साथ सम्मेलन का उद्देश्य व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाना और पीड़ित परिवारों को हिम्मत देना है।
सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने थैलेसीमिया रोग प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
प्रमुख विशेषज्ञों में शामिल रहे:
डॉ. दिनेश पेंढारकर (फरीदाबाद), डॉ. दिनेश भुरानी (नई दिल्ली), डॉ. रूबी खान (भोपाल), डॉ. सुनील भट्ट (बेंगलुरु), डॉ. सुनीत लोकवानी (इंदौर), डॉ. प्रीति मालपानी (इंदौर), डॉ. मेजर अजीत प्रताप सिंह, डॉ. मुस्तफा अली, डॉ. सुजाता गुप्ता, डॉ. महेंद्र पाटिल, डॉ. कृष्णकुमार कारपेंटर, डॉ. सुदर्शन गुप्ता, डॉ. अपूर्व चौहान, डॉ. लाड़ धाकड़, डॉ. आर.के. खद्योत (नीमच), डॉ. वैभव शाह, डॉ. ज्वेल बेंकर (अहमदाबाद), डॉ. अर्पित मित्तल (उदयपुर) आदि।
पहले दिन विशेषज्ञों ने पीड़ित बच्चों व उनके अभिभावकों के साथ संवाद कर बीमारी की गंभीरता, उपचार की दिशा, बोन मैरो ट्रांसप्लांट की संभावना, और जीवनशैली में जरूरी सावधानियों पर जानकारी दी। दूसरे दिन, रविवार को विशेष ओपीडी का आयोजन किया गया, जिसमें मरीजों की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद निःशुल्क उपचार भी उपलब्ध कराया जाएगा।