जिसे बताया गन फैक्ट्री का मास्टरमाइंड, वह निकला हथियारों का मिस्त्री! नानालाल सिकलीगर गिरफ्तार , मनासा गन फैक्ट्री निकली अबूझ पहेली
फिल्म का ट्रेलर तो बेहद धमाकेदार था, लेकिन क्लाइमेक्स अब तक फीका और अधूरा नजर आ रहा है।
(तबरेज अगवान / मनीष नायक)
नीमच/मनासा। 21 मई को मनासा पुलिस ने पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रेसवार्ता की। टेबल पर देशी पिस्टलें रखी गईं, हथियारों के पुर्जे दिखाए गए, अवैध फैक्ट्री का दावा किया गया और राजस्थान तक फैले नेटवर्क की आशंका जताई गई। पुलिस अधिकारियों ने इसे बड़ी सफलता बताया। संदेश साफ था—मनासा में अवैध हथियारों के कारोबार की जड़ तक पहुंचने का दावा किया जा रहा था।
लेकिन कहानी यहीं से दिलचस्प हो जाती है।
जिस नानालाल सिकलीगर को इस पूरे मामले का मुख्य किरदार माना जा रहा था, वह पुलिस दबिश के दौरान फरार हो गया। पुलिस उसे तलाशती रही और आखिरकार खुलासे के पूरे आठ दिन बाद 29 मई को आंत्रीमाता गांव के पास एक तालाब क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।
यहीं से लोगों को उम्मीद थी कि अब असली राज सामने आएंगे।
क्योंकि प्रेसवार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने साफ संकेत दिए थे कि मामला केवल एक पिस्टल या एक आरोपी का नहीं है। पुलिस के अनुसार हथियारों की सप्लाई, तस्करों तक पहुंच और राजस्थान कनेक्शन जैसे गंभीर पहलुओं की जांच की जा रही थी। बरामद मशीनें, बंदूक की नाल, ट्रिगर, मैगजीन और अन्य सामग्री भी इस दावे को मजबूत कर रही थीं।
लेकिन मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद तस्वीर अचानक बदलती नजर आई।
रिमांड के दौरान नानालाल सिकलीगर ने खुद को हथियार निर्माता नहीं बल्कि हथियारों की मरम्मत करने वाला बताया। इसके बाद पुलिस की ओर से किसी बड़े नेटवर्क, तस्कर गिरोह, सप्लाई चेन या राजस्थान कनेक्शन को लेकर कोई नया खुलासा सामने नहीं आया।
यहीं से सवाल खड़े होने लगे हैं।
यदि नानालाल इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड था तो उसकी गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क के अन्य चेहरे क्यों सामने नहीं आए?
यदि हथियार तस्करों तक पहुंच रहे थे तो वे तस्कर कौन हैं?
यदि राजस्थान कनेक्शन था तो जांच कहां तक पहुंची?
यदि यह अवैध हथियार फैक्ट्री थी तो उसके ग्राहक कौन थे?
और यदि आरोपी केवल हथियार सुधारने का काम करता था तो घर से मिली सामग्री और बरामद पिस्टलों की व्याख्या क्या है?
पूरे घटनाक्रम को देखें तो शुरुआती दृश्य किसी फिल्म के ट्रेलर जैसा था—तेज, रोमांचक और बड़े खुलासों के संकेतों से भरा हुआ। लेकिन मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कहानी की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
21 मई की प्रेसवार्ता में जिस मामले को पुलिस ने बड़े नेटवर्क से जोड़कर पेश किया था, उसी मामले में 29 मई को मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अपेक्षित खुलासे सामने नहीं आ सके हैं।
अब लोगों की नजर पुलिस जांच पर है। क्योंकि इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय शायद अभी लिखा जाना बाकी है। सवाल वही है—क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला था या फिर अवैध हथियारों के किसी बड़े नेटवर्क की केवल एक झलक?
पूरे घटनाक्रम को देखकर लोगों के बीच एक ही चर्चा रहेगी—फिल्म का ट्रेलर तो बेहद धमाकेदार था, लेकिन क्लाइमेक्स अब तक फीका और अधूरा नजर आ रहा है।
मुख्य आरोपी नानालाल सिकलीगर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। मामले में बरामद हथियारों, उपकरणों और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच जारी है। आरोपी नशे का आदी है और उसने रिमांड में हथियार मरम्मत की बात कबूली है। पुलिस हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता या नेटवर्क से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।"
— नीलेश अवस्थी, थाना प्रभारी, मनासा
