90 परिवारों का सपना अधूरा? वार्ड 9, 10 और 11 में आवास सर्वे पर उठे सवाल
कांग्रेस पार्षदों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, बोले- जर्जर मकानों में रह रहे पात्र परिवार सूची से बाहर
नीमच। प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे को लेकर शहर में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया है कि जिन परिवारों के लिए यह योजना बनाई गई थी, वही बड़ी संख्या में लाभ से वंचित रह गए हैं। वार्ड 9, 10 और 11 में हुए सर्वे पर सवाल उठाते हुए पुनः सर्वे और भौतिक सत्यापन की मांग जिला प्रशासन के सामने रखी गई है।
वार्ड क्रमांक 9 के पार्षद गोविंद दीवान और पार्षद प्रतिनिधि मुकेश पोरवाल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दावा किया कि कई ऐसे परिवार, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और आज भी कच्चे एवं जर्जर मकानों में रह रहे हैं, उन्हें सर्वे के दौरान अपात्र घोषित कर दिया गया। उनका कहना है कि पात्रता निर्धारण में हुई कथित त्रुटियों के कारण जरूरतमंद परिवार योजना से बाहर रह गए।
कांग्रेस पार्षदों के अनुसार वार्ड 9, 10 और 11 में करीब 90 से अधिक परिवार ऐसे हैं, जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता रखते हैं, लेकिन अब तक उन्हें लाभ नहीं मिला। उनका आरोप है कि सर्वे रिपोर्ट और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि संबंधित वार्डों में दोबारा सर्वे कराया जाए और हर मामले का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया जाए। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई गई तो बड़ी संख्या में ऐसे परिवार सामने आएंगे, जिन्हें तत्काल योजना का लाभ मिलना चाहिए।
पार्षदों ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल आंकड़ों की योजना नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने का माध्यम है। इसलिए पात्र परिवारों को सूची से बाहर रहना योजना की मंशा के विपरीत है।
अब यह मामला जिला प्रशासन के पास पहुंच चुका है। यदि पुनः सर्वे की मांग स्वीकार होती है तो कई परिवारों की पात्रता का पुनर्मूल्यांकन हो सकता है। वहीं योजना से वंचित परिवारों की उम्मीदें भी इस मांग से जुड़ गई हैं।
क्या सर्वे में वास्तव में पात्र परिवार छूट गए हैं, या फिर पात्रता के नियमों को लेकर भ्रम की स्थिति है? इसका जवाब अब प्रशासनिक जांच और संभावित पुनः सर्वे के बाद ही सामने आएगा।
