सीमांकन हुआ, कब्जा भी मिला... फिर भी नहीं मिली जमीन! 84 वर्षीय विधवा तीसरी बार पहुंची जनसुनवाई

  नीमच
  डेस्क न्यूज
  02 June, 2026
icon

अडमालिया की बुजुर्ग महिला का आरोप- पड़ोसी फिर कर रहे खेती, न्याय के लिए प्रशासन के चक्कर लगाने को मजबूर

नीमच। 84 वर्ष की उम्र में जहां लोग सहारे की उम्मीद करते हैं, वहीं ग्राम अडमालिया की एक बुजुर्ग विधवा अपनी ही जमीन वापस पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। सीमांकन हो चुका, राजस्व अमले ने कब्जा भी सौंप दिया, लेकिन हकीकत में आज भी वह अपनी जमीन पर अधिकार नहीं पा सकी है। यही पीड़ा लेकर हुलासी बाई तीसरी बार कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचीं।

ग्राम अडमालिया निवासी हुलासी बाई पति स्वर्गीय काशीराम ने जनसुनवाई में दिए आवेदन में बताया कि वह वृद्ध और विधवा हैं तथा परिवार में उनका कोई सहारा नहीं है। उनकी कृषि भूमि सर्वे नंबर 617/2/2, रकबा 0.57 हेक्टेयर स्थित है, जो उनके जीवनयापन का एकमात्र आधार है।

महिला के अनुसार भूमि विवाद के चलते उन्होंने सीमांकन की मांग की थी। राजस्व विभाग ने प्रकरण क्रमांक आरएस/432/0736/1161/2026 में सीमांकन की कार्रवाई पूरी की और मौके पर भूमि का कब्जा भी उन्हें सौंप दिया। लेकिन कुछ समय बाद पड़ोसी किसानों द्वारा फिर से भूमि पर कब्जा कर खेती किए जाने का आरोप है।

हुलासी बाई का आरोप है कि पड़ोसी दिलीप कुमार नागदा और रामगोपाल सीमांकन के बाद भी जमीन खाली नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वह अपनी भूमि पर अधिकार की बात करती हैं तो उन्हें टाल दिया जाता है और कथित रूप से अभद्र व्यवहार भी किया जाता है।

बुजुर्ग महिला का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। इसी कारण उन्हें तीसरी बार जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की मांग करनी पड़ी।

जनसुनवाई में दिए आवेदन में हुलासी बाई ने कलेक्टर से मांग की है कि उनकी भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए तथा मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जीवन की इस उम्र में उनकी केवल एक ही इच्छा है— अपनी जमीन पर अपना हक मिल जाए।

अब यह मामला एक बार फिर प्रशासन के समक्ष पहुंचा है। सीमांकन और कब्जा सौंपे जाने के बाद भी यदि भूमि विवाद बना हुआ है तो यह सवाल भी उठ रहा है कि आदेशों का जमीन पर पालन आखिर क्यों नहीं हो पा रहा। फिलहाल बुजुर्ग महिला को उम्मीद है कि इस बार उनकी फरियाद सिर्फ सुनी ही नहीं जाएगी, बल्कि उन्हें न्याय भी मिलेगा।