"सिर्फ भोजन उड़ाने और फेसबुक पर फोटो चमकाने आते हैं": बीजेपी प्रदेश प्रभारी ने प्रशिक्षण शिविर में नेताओं की लगाई क्लास, कूलर भी कराए बंद
बड़वाह (मध्य प्रदेश): दुनिया की सबसे बड़ी और अनुशासित पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय नेताओं को शनिवार की शाम एक बेहद असहज और शर्मिंदा करने वाली स्थिति का सामना करना पड़ा। खरगोन जिले के बड़वाह में आयोजित भाजपा के एक प्रशिक्षण शिविर में उस समय हड़कंप मच गया, जब पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह एक कड़क मास्टर की भूमिका में नजर आए। उन्होंने शिविर में आए नेताओं और कार्यकर्ताओं को लंबा-चौड़ा भाषण देने या अपनी अगवानी कराने के बजाय, उनसे सीधे जिले, राज्य और पार्टी से जुड़े कड़े सवाल दागने शुरू कर दिए।
आमतौर पर राजनेताओं के दौरों में दिखने वाले भव्य स्वागत, भारी-भरकम फूल-मालाओं और मुस्कुराते हुए फोटो सेशन के विपरीत, इस बैठक का नजारा पूरी तरह बदला हुआ था। स्थानीय नेता ५० किलो की फूल मालाएं और मिठाई के पैकेट लेकर स्वागत की तैयारी में थे, लेकिन डॉ. महेंद्र सिंह ने आते ही सबसे पहला कदम यह उठाया कि हॉल में चल रहे सभी कूलर बंद करवा दिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिजली और ईंधन बचाने के संकल्प को अपने जीवन में नहीं उतारेंगे, तब तक आम जनता के बीच क्या संदेश जाएगा। तपती गर्मी में कूलर बंद होते ही पांडाल में बैठे नेताओं के पसीने छूटने लगे, लेकिन असली परीक्षा तो तब शुरू हुई जब सवालों की बौछार हुई।
"अगर गले में भगवा दुपट्टा डाल दिया और मंडल अध्यक्ष या जिला पदाधिकारी बन गए, तो यह मत सोचना कि मुझसे बच जाओगे। किसी भी मोड़ पर मिलोगे तो छोड़ूंगा नहीं, सवाल जरूर पूछूंगा।"
— डॉ. महेंद्र सिंह, प्रदेश प्रभारी (मंच से नेताओं को चेताते हुए)
इन बुनियादी सवालों पर बंधी घिग्गी
प्रदेश प्रभारी ने उपस्थित मंडल अध्यक्षों और जिला पदाधिकारियों से बेहद बुनियादी सवाल पूछे। उन्होंने पूछा:
भारतीय जनता पार्टी का संविधान क्या है और इसकी पहली पंक्ति में क्या लिखा है? मध्य प्रदेश की वर्तमान स्टेट जीडीपी (GDP) और कृषि विकास दर के आंकड़े क्या हैं?
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और महाकाल लोक के सांस्कृतिक महत्व पर क्या जानकारी है?
जिस क्षेत्र में रह रहे हैं, वहां मां नर्मदा के विषय में नेताओं को क्या ज्ञान है?
सबसे आश्चर्यजनक स्थिति तब बनी जब मां नर्मदा के आंचल में बसे इस क्षेत्र के नेता खुद नर्मदा नदी के इतिहास और विरासत से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दे पाए। पूरे पांडाल में स्कूल के उन बच्चों जैसी खामोशी पसर गई जो होमवर्क न करने पर बेंच के पीछे छुपने का प्रयास करते हैं। बड़े-बड़े मंचों पर माइक थामकर दहाड़ने वाले नेता एक-दूसरे का मुंह ताकते नजर आए।
"यह फोटो पॉलिटिक्स और शाही दावतों का मंच नहीं"
नेताओं की अज्ञानता पर भारी नाराजगी व्यक्त करते हुए डॉ. महेंद्र सिंह ने मंच से ही सबकी जमकर क्लास ली। उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा, "खरगोन जिले और मंडल का यह प्रशिक्षण वर्ग बिल्कुल शून्य है। ऐसा प्रतीत होता है कि आप लोग इन प्रशिक्षण शिविरों में केवल बढ़िया भोजन उड़ाने और फेसबुक-व्हाट्सएप पर अपनी तस्वीरें चमकाने के लिए आते हैं।" उन्होंने साफ किया कि केवल गले में पटका डाल लेने या पद धारण कर लेने से कोई सच्चा कार्यकर्ता नहीं बन जाता।
प्रभारी ने नेताओं को सचेत करते हुए कहा कि वे यहां किसी की परीक्षा लेने नहीं आए थे, बल्कि उन्हें जमीन पर जागरूक करने आए हैं। उन्होंने जमीनी हकीकत की नब्ज पकड़ते हुए कहा, "जब आप गांवों में जाएंगे और दूसरी पार्टी का कोई व्यक्ति आपसे नीतियों या आंकड़ों पर बात करेगा, तो आप नर्वस होकर उसकी हां में हां मिलाने लगेंगे क्योंकि आपको खुद कुछ पता नहीं है। एक कार्यकर्ता को वैचारिक अधिष्ठान, केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के आंकड़े और अपनी कार्य पद्धति के प्रति पूरी तरह लैस होना चाहिए।"
यह खबर अब राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हो रही है, जिसने पार्टी के भीतर जमीनी स्तर पर नेताओं की बौद्धिक और राजनीतिक तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फोटो पॉलिटिक्स और शाही दावतों में मशगूल रहने वाले नेताओं के लिए आलाकमान का यह एक बड़ा और कड़ा संदेश है।अब देखना यह होगा कि इस भारी फजीहत और फटकार के बाद स्थानीय नेता पन्नों को पलटकर अपनी कार्यशैली में क्या सुधार लाते हैं।
