अल्ट्राटेक सीमेंट की मनमानी पर न्यायालय का बड़ा हंटर: 58 वर्ष में सेवानिवृत्ति अवैध, श्रमिकों को पूरा वेतन और री-ज्वाइनिंग के आदेश, प्रबंधन को तगड़ा झटका- श्रमिकों में जश्न
- अल्ट्राटेक प्रबंधन को तगड़ा झटका, राजपत्र के नियमों को ठेंगे पर रख कर रहा था काम
- दीपक कुलश्रेष्ठ और उद्यमी राम जाट के पक्ष में आया ऐतिहासिक फैसला, 1 जून से लौटेंगे काम पर
- हाईकोर्ट और औद्योगिक न्यायालय के थप्पड़ के बाद भी नहीं सुधरा प्रबंधन, सुप्रीम कोर्ट तक घसीटा मामला
नीमच। औद्योगिक क्षेत्र जावद के खोर स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन की तानाशाही और मनमाने रवैये पर माननीय औद्योगिक न्यायालय इंदौर ने जोरदार कानूनी हंटर चलाया है। न्यायालय ने दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई करते हुए अल्ट्राटेक प्रबंधन द्वारा फैक्ट्री श्रमिकों, टेक्नीशियनों और कर्मचारियों की 58 वर्ष की उम्र में की जा रही सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) को पूरी तरह अवैध, अनुचित और दुर्भावनापूर्ण करार दिया है।
अदालत ने पीड़ित श्रमिकों को उनके पिछले सेवाकाल का पूरा वेतन एरियर सहित भुगतान करने और आगामी 1 जून 2026 से उन्हें बचे हुए सेवाकाल के लिए फैक्ट्री में दोबारा ज्वाइन कराने का कड़ा आदेश जारी किया है।
क्या है पूरा मामला और प्रबंधन की हेकड़ी?
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के प्रदेश सचिव कामरेड शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने इस धारदार फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री में कार्यरत दीपक कुलश्रेष्ठ एवं उद्यमी राम जाट को प्रबंधन ने 58 वर्ष की आयु पूरी होने का हवाला देकर जबरन रिटायर कर दिया था। प्रबंधन की इस तानाशाही को दोनों श्रमिकों ने औद्योगिक न्यायालय में चुनौती दी थी।
उल्लेखनीय है कि ट्रेड यूनियनों के एक लंबे और कड़े संघर्ष के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 28 जून 2014 को ही 'मध्य प्रदेश मानक स्थाई आदेश' में संशोधन कर औद्योगिक श्रमिकों की सेवानिवृत्ति की आयु को 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दिया था। 25 अक्टूबर 2014 को इसका बाकायदा राजपत्र (गजट) भी नोटिफिकेशन जारी हो चुका था। इसके बावजूद, देश की इतनी बड़ी सीमेंट कंपनी सरकार के राजपत्र को ठेंगे पर रखकर लगातार अपने कर्मचारियों के हकों का खून कर रही थी और उन्हें 58 साल में ही बाहर का रास्ता दिखा रही थी।
अदालतों से बार-बार थप्पड़, फिर भी नहीं चेता प्रबंधन
यह कोई पहला मामला नहीं है जब अल्ट्राटेक की किरकिरी हुई हो। इससे पहले भी कई पीड़ित श्रमिक श्रम न्यायालय, औद्योगिक न्यायालय और यहाँ तक कि माननीय उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ की डबल बेंच तक से अपने हक की लड़ाई जीत चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, लोक अदालत में भी अड़ा रहा प्रबंधन:
ईकोर्ट से मुंह की खाने के बाद भी अल्ट्राटेक प्रबंधन की हेकड़ी कम नहीं हुई और वह आदेशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नीमच विधिक प्राधिकरण में 21, 22 और 23 मई 2026 को आयोजित विशेष लोक अदालत में इस मामले को आपसी समझौते के लिए भेजा था। लेकिन वहां भी कॉर्पोरेट लालच के चलते प्रबंधन का रुख बेहद अड़ियल और असंतोषजनक रहा। अंततः कानून के डंडे ने प्रबंधन की इस मनमानी को चकनाचूर कर दिया।
श्रमिकों में जश्न का माहौल, अन्य पीड़ित कर्मचारियों के लिए खुला रास्ता
औद्योगिक न्यायालय में श्रमिकों की ओर से इस मजबूत कानूनी लड़ाई की पैरवी एडवोकेट बीएस शेखावत ने की। उनकी अकाट्य दलीलों के आगे प्रबंधन का कोई बहाना नहीं टिक सका।
इस ऐतिहासिक और धारदार निर्णय के बाद अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री खोर में कार्यरत हजारों श्रमिकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है और उन्होंने मिठाई बांटकर इस जीत का जश्न मनाया। इस फैसले ने उन तमाम कर्मचारियों के लिए भी न्याय के द्वार खोल दिए हैं जिन्हें प्रबंधन ने पिछले कुछ सालों में गैर-कानूनी तरीके से 58 वर्ष की उम्र में जबरन रिटायर कर घर बैठा दिया था। अब ऐसे सभी कर्मचारियों के लिए न्यायालय जाकर अपना हक वापस पाने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
