द वॉचमेन पोस्ट EXCLUSIVE: नीमच में बहुचर्चित जमीन घोटाले में तहसीलदार-सरपंच-पटवारी सहित कई पर प्रकरण दर्ज: फर्जी वारिस बना कर हड़पी थी 2 हेक्टेयर जमीन  

  नीमच
  द वॉचमेन पोस्ट
  22 May, 2026
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नीमच। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल ने नीमच जिले के बहुचर्चित बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद आज की गई कारवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है । EOW ने नीमच जिले के ग्राम बैंसला में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए जमीन हड़पने के आरोप में एक व्यक्ति और उसे सहयोग करने वाले सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।WP

विदीत है कि एक जालसाज ने मृत व्यक्ति का बेटा बनकर न केवल सरकारी तंत्र को गुमराह किया, बल्कि तहसीलदार, सरपंच और पटवारी जैसे जिम्मेदार लोकसेवकों की मिलीभगत से लगभग 2 हेक्टेयर की बेशकीमती कृषि भूमि अपने नाम करवा ली ।WP

खुद को बताया मृतक का इकलौता वारिस
ग्राम बैंसला निवासी आरोपी भगवान मीणा ने मृतक केदार पिता धूरा की भूमि को हड़पने के लिए एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा । आरोपी ने खुद को मृतक केदार का पुत्र और एकमात्र कानूनी वारिस घोषित करवाने के लिए सरकारी दस्तावेजों में कूट-रचना का सहारा लिया । 

लोकसेवकों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे खेल में प्रशासनिक अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत सामने आई है:
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सरपंच और सचिव की भूमिका: ग्राम पंचायत बैंसला की तत्कालीन सरपंच प्रेमलता अमर रावत और सचिव आनंद सक्सेना ने आरोपी भगवान मीणा को मृतक केदार का वैध पुत्र बताते हुए फर्जी 'वारिसान प्रमाण पत्र' जारी कर दिया । WP
पटवारी की जालसाजी: WP तत्कालीन पटवारी अनुराग पाटीदार ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए गलत वंशावली, पंचनामा और प्रतिवेदन तैयार कर प्रकरण को आगे बढ़ाया ।  तहसीलदार का विवादित आदेश: तत्कालीन तहसीलदार रामपुरा, बालकृष्ण मकवाना ने बिना किसी निष्पक्ष जांच या सत्यापन के केवल इन फर्जी दस्तावेजों को आधार बनाकर आरोपी के पक्ष में 'फौती नामांतरण' का आदेश पारित कर दिया । 

ई.ओ.डब्ल्यू. का बड़ा प्रहार: धारा 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल में दर्ज शिकायत क्रमांक 772/25 की गहन जांच और सत्यापन के बाद यह स्पष्ट हुआ कि लोकसेवकों ने अपने पद का दुरुपयोग किया और आरोपी भगवान को अनुचित लाभ पहुँचाया ।  इस मामले में मुख्य आरोपी भगवान मीणा, सरपंच प्रेमलता अमर रावत, सचिव आनंद सक्सेना, पटवारी अनुराग पाटीदार, तत्कालीन तहसीलदार बालकृष्ण मकवाना एवं अन्य के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधन) 2018 की धारा 7(ग) एवं 12 के तहत संज्ञेय अपराध पंजीबद्ध किया गया है । ई.ओ.डब्ल्यू. ने मामले को विवेचना में ले लिया है और इस पूरे गिरोह के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
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