नीमच नपाध्यक्ष विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जस्टिस प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने 20+ याचिकाएं खारिज कीं, भाजपा-कांग्रेस की कानूनी जंग पर ब्रेक
नीमच/इंदौर। (तबरेज़ अगवान) मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में नीमच नगर पालिका अध्यक्ष पद को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई पर बड़ा फैसला आया है। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने करीब 8 पन्नों के विस्तृत आदेश में नीमच सहित प्रदेशभर की 20 से अधिक याचिकाओं को “अत्यधिक देरी (Delay and Laches)” के आधार पर खारिज कर दिया।
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव से जुड़े मामलों को वर्ष 2026 में चुनौती देना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है और ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
नीमच मामला: स्वाति चोपड़ा के खिलाफ कौन पहुंचा कोर्ट?
नीमच नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें प्रमुख नाम
नीतू सिंह ठाकुर पति शैलेंद्र सिंह ठाकुर और नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति है।
इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि बिना वैध गजट नोटिफिकेशन के अध्यक्ष पद के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों का उपयोग किया जा रहा है, जो मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 के प्रावधानों के विरुद्ध है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस प्रणय वर्मा ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा—
याचिकाएं करीब 4 साल की देरी से दायर की गईं। याचिकाकर्ता अपने अधिकारों को लेकर “निष्क्रिय” रहे । इतनी देरी के बाद राहत नहीं दी जा सकती ।
कोर्ट ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि
“जो लोग वर्षों तक अपने अधिकारों को लेकर सोए रहे, वे संवैधानिक राहत के हकदार नहीं हैं।”
साथ ही यह भी कहा गया कि—
अगर अब हस्तक्षेप किया गया, तो पिछले 4 साल में लिए गए वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों पर असर पड़ेगा और प्रशासनिक अव्यवस्था (Administrative Chaos) पैदा होगी।
8 पन्नों के आदेश में क्या-क्या?
कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा—
ग़जट नोटिफिकेशन का मुद्दा पहले से न्यायालयों में उठ चुका है । कुछ मामलों में समय पर याचिका आने पर कार्रवाई भी हुई लेकिन देरी से दायर याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता
कोर्ट ने ग्वालियर खंडपीठ के पूर्व फैसले (विजय सिंह बनाम राज्य शासन) का हवाला देते हुए समान रुख अपनाया।
भाजपा बनाम कांग्रेस: कोर्ट तक पहुंची सियासत
यह मामला सिर्फ नीमच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी कानूनी टक्कर बन गया—
कांग्रेस समर्थित नेताओं ने भाजपा अध्यक्षों के खिलाफ याचिकाएं दायर कीं:
- श्योपुर: रेणु गर्ग (भाजपा)
- डबरा: लक्ष्मीबाई (भाजपा)
- सीधी: काजल वर्मा (भाजपा)
- पानसेमल: भाजपा अध्यक्ष के अधिकार खत्म करने लगाई गई।
वहीं भाजपा नेताओं ने भी विपक्ष को घेरा:
जावरा: अनम यूसुफ कपाड़िया (कांग्रेस समर्थित) के खिलाफ भाजपा पार्षद रुक्मणी धाकड़ कोर्ट पहुंचीं
यानी दोनों दलों ने एक-दूसरे को कोर्ट में चुनौती दी
नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा (भाजपा) ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा—
“यह सत्य और कानून की जीत है। राजनीतिक द्वेष के चलते लगाए गए आरोप कोर्ट में टिक नहीं पाए।”
नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति ने कहा—
“मामला तकनीकी और समय सीमा के आधार पर खारिज हुआ है। असली मुद्दा अभी भी बना हुआ है, हम आगे कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे।”
बड़ा सवाल
क्या देरी के कारण असली कानूनी मुद्दा दब गया?
या फिर यह पूरा मामला सिर्फ सियासी लड़ाई बनकर रह गया?
हाईकोर्ट के इस फैसले ने नीमच नगर पालिका अध्यक्ष विवाद को फिलहाल कानूनी विराम दे दिया है, लेकिन जिस तरह भाजपा और कांग्रेस दोनों एक-दूसरे के खिलाफ अदालत पहुंचे, उससे साफ है कि यह लड़ाई सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं—बल्कि सियासत के केंद्र में बनी रहेगी।
