चिकित्सा पेशा नहीं, मानव सेवा का माध्यम: सीएम मोहन यादव
स्वास्थ्य विभाग और सेवांकुर भारत प्रकल्प के बीच 5 साल का एमओयू, सेवा-प्रधान डॉक्टर तैयार करने पर फोकस
भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे चिकित्सकों की आवश्यकता है, जो मरीजों की सेवा को अपना धर्म मानें और समाज के प्रति समर्पित हों।
मुख्यमंत्री समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास में आयोजित समझौता ज्ञापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल की उपस्थिति में राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग और सेवांकुर भारत प्रकल्प के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौता डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान, छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) के सहयोग से किया गया है। पांच वर्षों के लिए किए गए इस एमओयू का उद्देश्य मध्यप्रदेश को सेवा-प्रधान स्वास्थ्य नेतृत्व का मॉडल राज्य बनाना है। इसके तहत ऐसे डॉक्टर तैयार किए जाएंगे, जो पेशेवर दक्षता के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनें।
एमओयू के अंतर्गत “एक सप्ताह देश के नाम” कार्यक्रम संचालित किया जाएगा, जिसमें करीब 300 प्रतिभागियों को छत्रपति संभाजीनगर में गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद अनुभव साझा सत्र और व्यक्तित्व विकास शिविर भी आयोजित होंगे।
संस्था का योगदान
उल्लेखनीय है कि डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान की स्थापना वर्ष 1989 में समाजसेवी चिकित्सकों द्वारा की गई थी। पिछले तीन दशकों में संस्था 70 लाख से अधिक जरूरतमंद मरीजों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं दे चुकी है।
संस्था का प्रमुख केंद्र डॉ. हेडगेवार रुग्णालय है, जहां सेवाभाव और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ आमजन को उपचार उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान में संस्था देशभर में 46 से अधिक परियोजनाएं संचालित कर रही है, जिनमें मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग एवं फिजियोथेरेपी संस्थान और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
हृदय शल्य चिकित्सा, आईवीएफ, नवजात देखभाल, एमआरआई और कैथ लैब जैसी उन्नत सुविधाओं के साथ संस्था महिला एवं बाल विकास, टीकाकरण और जनस्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।
