मोदी के ‘सोना मत खरीदो’ बयान से भाजपा के गढ़ में हलचल, नीमच सर्राफा बाजार में कांग्रेस संग दिखे व्यापारी, कांग्रेस ने बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा
नीमच। नीमच का सर्राफा बाजार मंगलवार शाम अचानक राजनीतिक रणभूमि में तब्दील होता नजर आया, जब जिला कांग्रेस हाथों में पार्टी का झंडा लेकर घंटाघर स्थित सर्राफा बाजार में उतर गई। कांग्रेस नेताओं ने दुकान-दुकान पहुंचकर व्यापारियों से जनसंवाद किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को लेकर माहौल गर्माया, जिसमें उन्होंने देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने, विदेश यात्राएं कम करने, पेट्रोल-डीजल बचाने और वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की थी।
राजनीतिक रूप से सबसे अहम बात यह रही कि भाजपा समर्थक माने जाने वाले कई सर्राफा व्यापारियों ने भी खुलकर मोदी के बयान का विरोध किया और कांग्रेस द्वारा उठाए गए मुद्दे को “व्यापार हित” से जुड़ा बताया। यही वजह रही कि पूरे घटनाक्रम ने शहर की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी।
चांदनी ज्वेलर्स से शुरू हुआ कांग्रेस का ‘वार’
कांग्रेस ने जनसंवाद अभियान की शुरुआत चांदनी ज्वेलर्स से की। दुकान संचालक संदीप चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “समझ नहीं आ रहा मोदीजी सुनार को खत्म करना चाहते हैं या व्यापार को। बाजार पहले ही मंदी से जूझ रहा है, ऐसे में यह बयान बेरोजगारी और संकट बढ़ाने वाला है। सर्राफा व्यापार सिर्फ दुकानदार नहीं, हजारों परिवारों का पेट पालता है।”
सरकार पहले अपना खर्च कम करे- राजु सर्राफ
सर्राफा एसोसिएशन अध्यक्ष और आरआर ज्वैलर्स संचालक राजेंद्र गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की इस अपील से व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि “सरकार को जनता से त्याग मांगने से पहले अपना खर्च कम करना चाहिए। सांसदों-विधायकों के वेतन कम करने चाहिए। इस तरह का बयान व्यापार के लिए अच्छा संकेत नहीं है।”
गोयल ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में सर्राफा एसोसिएशन भी व्यापारियों के साथ बैठक कर अपनी अलग रणनीति तय कर सकती है।
पहले भाजपा नेता पालन करें-रितेश गर्ग
पारसमणि ज्वेलर्स संचालक रितेश गर्ग ने कहा कि “अगर प्रधानमंत्री ऐसी अपील कर रहे हैं तो पहले भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को इसका पालन करना चाहिए। सोना भारतीय परिवार और संस्कृति का हिस्सा है। जिसने सोना खरीदा, उसने भविष्य सुरक्षित किया।”
कांग्रेस ने बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा
जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने प्रधानमंत्री के बयान को “व्यापार विरोधी” बताते हुए कहा कि यह छोटे व्यापारियों, कारीगरों और मजदूरों के पेट पर लात मारने जैसा है। उन्होंने कहा कि पहले ही महंगाई और सोने के बढ़ते दामों से बाजार प्रभावित है, ऊपर से ऐसा बयान सर्राफा कारोबार को तोड़ने वाला है।
नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है, जबकि छोटे व्यापारियों और आम लोगों से त्याग मांग रही है। उन्होंने कहा कि “जनता से बलिदान मांगा जा रहा है और सत्ता खर्च कम करने को तैयार नहीं है।”
महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष आशा सांभर ने बयान को “महिला विरोधी” बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं के श्रृंगार और विवाह परंपरा में जेवर का विशेष महत्व है। “संस्कृति को खत्म करने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी।”
भाजपा के गढ़ में कांग्रेस का नया दांव
पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि कांग्रेस जिन व्यापारियों से संवाद कर रही थी, उनमें कई ऐसे चेहरे भी थे जिन्हें शहर में भाजपा का मजबूत समर्थक माना जाता है। बावजूद इसके, व्यापारियों ने खुलकर प्रधानमंत्री के बयान पर नाराजगी जाहिर की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने महंगाई, मंदी और व्यापारिक असंतोष को जोड़ते हुए भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने का बड़ा दांव खेला है।
अब देखना यह होगा कि सर्राफा व्यापारियों की नाराजगी केवल बयान तक सीमित रहती है या आने वाले दिनों में यह मुद्दा भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती बनता है।
