प्रधानमंत्री के “त्याग” आव्हान पर उठे सवाल, कथनी-करनी के फर्क पर उठे प्रश्न,पहले नेता करें पालन— डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू
नीमच। युद्धकाल अथवा राष्ट्रीय संकट की परिस्थितियों में किसी भी देश का प्रधानमंत्री जनता से संयम, त्याग और सहयोग की अपील करता है। भारत में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले बारह वर्षों में विभिन्न अवसरों पर देशवासियों से त्याग और अनुशासन का आव्हान किया जाता रहा है।
नोटबंदी, कोरोना काल, आत्मनिर्भर भारत अभियान, बुलेट ट्रेन परियोजना, सस्ती हवाई यात्रा योजनाएं और “हर घर नल-जल” जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के दौरान सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए। लेकिन इन योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। आम जनता का एक वर्ग मानता है कि अपेक्षित परिणाम अभी भी पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहे।
लेख में यह भी सवाल उठाया गया है कि “दान की शुरुआत अपने घर से होती है” वाली कहावत के अनुसार क्या सरकार, मंत्री, जनप्रतिनिधि और समर्थक स्वयं उन आव्हानों का पालन करते नजर आते हैं, जिनका संदेश जनता को दिया जाता है?
डॉ. जाजू का कहना है कि यदि सरकार पेट्रोल बचाने और संसाधनों के सीमित उपयोग की बात करती है, तो सबसे पहले नेताओं, मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो और सीमित वाहन उपयोग अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उनका तर्क है कि शीर्ष नेतृत्व का आचरण ही आम जनता को प्रेरित करता है।
गैस सब्सिडी छोड़ने के पुराने आव्हान का जिक्र करते हुए लेख में दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने स्वयं सब्सिडी नहीं छोड़ी।
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा गया कि जब उन्होंने देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की थी, तब उन्होंने स्वयं और उनके सहयोगियों ने पहले उसका पालन किया। इसी कारण जनता ने भी व्यापक रूप से उनका अनुसरण किया।
लेख में यह प्रश्न भी उठाया गया कि एक ओर सरकार भारत को विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताती है, वहीं दूसरी ओर आम लोगों से खाने के तेल, पेट्रोल, यात्रा और सोना खरीदने में कटौती की अपील की जाती है।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री के आव्हान के संदर्भ में हुई चर्चाओं का हवाला देते हुए लेख में कहा गया कि “राष्ट्र प्रथम” की भावना तभी प्रभावी होगी, जब त्याग और अनुशासन का पालन शीर्ष नेतृत्व से लेकर आम कार्यकर्ता तक समान रूप से किया जाए।
