नीमच में 'लाइव बम' बना बिजली का जलता ट्रांसफॉर्मर।। फायर ब्रिगेड के पहुँचने तक ‘अंत्येष्टि’ सम्पन्न ।। बिजली विभाग ‘उठावना’ कर रवाना।। अंधेरे में इलाका।। 15 दिनों में तीसरा ‘आत्मदाह’।। क्या सिस्टम में है ‘शॉर्ट-सर्किट’? पढ़ें, द वॉचमैन पोस्ट पर
नीमच । (कपिल सिंह चौहान) शहर के व्यस्ततम इलाकों और रिहायशी ब्लॉकों में लगे बिजली के ट्रांसफार्मर (डीपी) इन दिनों राहगीरों और निवासियों के लिए ' लाइव बम ' साबित हो रहे हैं। आए दिन सरेराह धूं-धूं कर जलती ये डीपी (Distribution Pillar) न केवल सरकारी मशीनरी की पोल खोल रही हैं, बल्कि किसी बड़ी अनहोनी को भी न्योता दे रही हैं।
ताज़ा मामला जैन भवन के पास का है, जहां आज सोमवार शाम को डीपी में लगी भीषण आग ने इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। अचानक बिजली के खंबे में लगी इस आग से आसपास खरीदारी कर रही महिलायें, बच्चे और दुकानदारों में दहशत फेल गई। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि इस जलते बिजली के खंबे को केसे बुझाएँ। उस पर ना पानी छिड़क सकते हैं ना धूल… अंततः दो फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची लेकिन तब तक ट्रांसफार्मर की ‘अंत्येष्टि’ हो चुकी थी। मौके पर बिजली विभाग का अमला भी पहुंचा था, लेकिन तब तक क्या ट्रांसफार्मर और क्या केबल… सब कुछ जल कर खाक हो गया सो बिजली विभाग का अमला भी इलाके को अंधेरे में छोड़ ‘उठावना’ कर रवाना हो गया।
सिलसिलेवार हादसों से भी नहीं टूटी कुंभकर्णी नींद
एक हो, दो हो, तीन हो…यहाँ तो लगातार घटनाएँ हो रही हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले 15 दिनों में नीमच शहर के अलग-अलग हिस्सों में इस आगजनी के कई मामले सामने आए हैं।
27 अप्रैल 26 : दूरसंचार कार्यालय के पास भूतेश्वर मंदिर रोड पर डीपी भीषण लपटों के साथ जल उठी। घटना से इलाके में दहशत हो गई…इस हादसे के बाद राजस्व कॉलोनी और आसपास का
इलाका घंटों अंधेरे में डूबा रहा, जिससे भरी गर्मी में जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
1 मई 26: इसी तरह कीलेश्वर मंदिर रोड़ पर भी एक डीपी से आग के शोले निकलने लगे। दर्शनार्थियों और पास के रहवासियों ने बिजली अमले को सूचना दी और आए।
ताज़ा घटना: 11 मई सोमवार की शाम जैन भवन के पास लगी आग ने एक बार फिर सुरक्षा दावों की हवा निकाल दी है।
गुणवत्ता पर सवाल: क्या खराब मेंटेनेंस है असली वजह या सिस्टम में है ‘शॉर्ट-सर्किट’ ?
पश्चिमी क्षेत्र विद्युत वितरण केंद्र के अधिकारियों की लापरवाही अब जनता पर भारी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि क्या कंपनी की मशीनरी और सर्विस की गुणवत्ता मानक स्तर की है? लगातार हो रहे इन शॉर्ट-सर्किट और धमाकों ने विभाग के 'प्री-मानसून मेंटेनेंस' और सुरक्षा ऑडिट के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
“यह बेहद खतरनाक स्थिति है। अधिकारी शायद किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं, क्योंकि शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।"– मनोज जैन, स्थानीय निवासी
ट्रांसफॉर्मस का ‘आत्मदाह’, अंधेरे में जनता, मौज में अफसर
कुछ दिनों के भीतर ही नीमच की शहरी सीमा में इतने ट्रांसफॉर्मस ने ‘आत्मदाह’ कर लिया लेकिन कोई नेता, जनप्रतिनिधी या अधिकारी बिजली विभाग में ‘बैठने’ नहीं गया… विभाग के जिम्मेदारों से किसी ने सवाल तक नहीं किया कि इन हादसों की वजह क्या है और इन पर कैसे नियंत्रण पाना है।जब भी कोई डीपी जलती है, तो उसका खामियाजा सिर्फ विभाग के राजस्व को नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के नागरिकों को भी भुगतना पड़ता है। घंटों बिजली गुल रहना अब नीमच के कई इलाकों की नियति बन चुका है। हैरानी की बात यह है कि बार-बार होते इन हादसों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के 'कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही' है।
क्या बिजली कंपनी इन पुरानी और जर्जर हो चुकी डीपी को बदलने की जहमत उठाएगी ? और यदि ये ट्रांसफॉर्मस नए हैं तो क्या डीपी की इंटरनल वायरिंग और कनेक्शन में इस्तेमाल होने वाला सामान मानक स्तर का है? बार-बार आग लगना इस बात की ओर इशारा करता है कि शायद सामान की खरीद में 'क्वालिटी' से ज्यादा 'कमीशन' को तवज्जो दी गई है। सवाल यह भी है की मेन्टेनेन्स के नाम पर प्रति वर्ष लाखों रुपये की ‘होली’ जलाने के बाद भी हालात ऐसे क्यों हैं ?
विभाग इन सवालों का जवाब देगा या शहर किसी दिन बड़ी जनहानि का गवाह बनेगा। इन आगजनी की घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। घटिया वायरिंग और पुराने मटीरियल का खामियाजा शहर की जनता अपनी जान जोखिम में डालकर क्यों भुगते?
विद्युत वितरण केंद्र को अब यह स्पष्ट करना होगा कि वे इन 'लाइव बमों' को कब निष्क्रिय करेंगे और क्या दोषी ठेकेदारों या अधिकारियों पर कोई गाज गिरेगी?
