हल्दी की रस्म से ICU तक पहुंच रहे दूल्हा-दुल्हन… नीमच में कब जागेगा खाद्य विभाग?चेहरे पर लगने वाली हल्दी… फेफड़ों तक पहुंचा रही ज़हर! दुल्हा - दुल्हन ICU में…
इंदौर। शादी… खुशियों का सबसे बड़ा उत्सव…लेकिन अब उसी शादी की “हल्दी रस्म” डर और दहशत का कारण बनती जा रही है।
इंदौर के एमवाय अस्पताल में पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां हल्दी लगाने के बाद दूल्हा-दुल्हन की हालत बिगड़ गई। किसी के शरीर पर लाल चकत्ते उभर आए… किसी के होंठ और चेहरा सूज गया… तो किसी को सांस लेने में इतनी तकलीफ हुई कि ICU और वेंटिलेटर तक की नौबत आ गई।
खरगोन जिले की 21 वर्षीय राखी की शादी की खुशियां उस वक्त मातम में बदलने लगीं, जब हल्दी रस्म के कुछ ही देर बाद उसके पूरे शरीर पर एलर्जी फैल गई। डॉक्टरों के मुताबिक बाजार में बिक रही सस्ती और खुली हल्दी में “मेटानिल यलो” जैसे खतरनाक केमिकल मिलाए जा रहे हैं, जो शरीर के लिए जहर साबित हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब नीमच जिले पर खड़ा हो रहा है…
क्या नीमच के बाजारों में बिक रही खुली हल्दी सुरक्षित है?
क्या गांवों और कस्बों में शादी समारोहों के लिए खरीदी जा रही सस्ती हल्दी की जांच कभी हुई?
क्या खाद्य एवं औषधि विभाग सिर्फ त्योहारों पर दिखावे की कार्रवाई करेगा या अब शादी सीजन में भी बड़े जांच अभियान चलेंगे?
नीमच जिले में इन दिनों शादियों का सीजन चरम पर है… हर घर में हल्दी की रस्म हो रही है… लेकिन बाजारों में खुलेआम बिक रही बिना ब्रांड और बिना गुणवत्ता जांच वाली हल्दी पर कोई निगरानी नजर नहीं आ रही।
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि मिलावटी हल्दी शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाकर फेफड़ों तक को डैमेज कर सकती है। मामूली खुजली से शुरू होने वाला रिएक्शन जानलेवा बन सकता है।
ऐसे में अब जरूरत है कि नीमच का खाद्य विभाग तुरंत सक्रिय हो…
किराना दुकानों, थोक व्यापारियों और मसाला बाजारों में सघन सैंपलिंग अभियान चलाया जाए…
खुली हल्दी बेचने वालों की जांच हो…और जनता को भी जागरूक किया जाए कि सस्ती हल्दी कहीं जिंदगी पर भारी न पड़ जाए।
क्योंकि…शादी की हल्दी अगर जहर बन जाए…तो खुशियों के घर में मातम आने में देर नहीं लगती।
