सोलह श्रृंगार कर महिलाओं ने की दशा माता की पूजा, पीपल वृक्ष की परिक्रमा कर मांगी सुख-समृद्धि की कामना
नीमच। शहर सहित आसपास के अंचलों में शुक्रवार को दशा माता का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर विधि-विधान से दशा माता की पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा मंगल की कामना की। सुबह से ही मंदिरों और पीपल वृक्षों के आसपास महिलाओं की भीड़ दिखाई दी, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजन संपन्न हुआ।
हिंदू धर्म में देवी पार्वती के अनेक स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनमें दशा माता का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दशा माता का व्रत और पूजन किया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 13 मार्च, शुक्रवार को मनाया गया। धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि दशा माता का व्रत करने से जीवन की विपरीत परिस्थितियां दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
दशा माता पूजन के दौरान महिलाओं द्वारा सोलह श्रृंगार कर पूजा करने की परंपरा है, जिसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और पीपल, नीम तथा बरगद जैसे त्रिवेणी वृक्षों की पूजा करती हैं। सनातन परंपरा में इन वृक्षों को अत्यंत पवित्र माना गया है और मान्यता है कि इनमें देवताओं का वास होता है।
पूजन के दौरान महिलाएं पीपल वृक्ष पर कुमकुम, मेहंदी, लच्छा, सुपारी और अक्षत अर्पित करती हैं तथा वृक्ष के चारों ओर सूत या धागा लपेटकर परिक्रमा करती हैं। इसके बाद पीपल की छाल, जिसे स्थानीय परंपरा में “सोना” कहा जाता है, श्रद्धा के साथ घर लाकर तिजोरी में रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता का व्रत व्यक्ति के जीवन की दशा को सुधारने वाला माना गया है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से घर-परिवार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, कष्टों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि महिलाओं में इस व्रत के प्रति विशेष आस्था देखने को मिलती है।
शुक्रवार को शहर के विभिन्न मंदिरों और पूजा स्थलों पर शुभ मुहूर्त में महिलाओं ने सामूहिक रूप से दशा माता की पूजा कर व्रत किया और परिवार की खुशहाली व समृद्धि की कामना की। पूरे शहर में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा।
