गणगौर महापर्व की पारंपरिक झेल निकली, बैंड-बाजों और लोकगीतों के बीच महिलाओं ने निभाई आस्था और परंपरा
नीमच। शहर में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी शीतला सप्तमी के बाद अग्र चेतना क्लब नीमच द्वारा 16 दिवसीय गणगौर महापर्व का उल्लासपूर्ण आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गांधी वाटिका से गणगौर की झेल निकाली गई। बैंड-बाजों और पारंपरिक गीतों के साथ निकली यह झेल श्रद्धा और उत्साह का आकर्षक दृश्य बन गई।
गणगौर की झेल गांधी वाटिका से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई विजय टॉकीज चौराहा, 40 नंबर चौराहा और कमल चौक से गुजरते हुए नरसिंह मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। रास्ते भर श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बने और महिलाओं के साथ लोकगीतों की मधुर धुनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
झेल प्रारंभ होने से पहले गांधी वाटिका में महिलाओं ने विधि-विधान से गणगौर माता और ईशर भगवान की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने गणगौर और ईशर को जल अर्पित किया तथा पारंपरिक रूप से गणगौर के झाले दिए। आयोजन के दौरान अग्र चेतना क्लब द्वारा “सुपर गणगौर” और “बेस्ट ईशर-गणगौर” प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर क्लब की अध्यक्ष सविता गोयल, सुलेखा मित्तल, कविता एरन, रेखा अग्रवाल, मंजू अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर कार्यक्रम में शामिल हुईं। महिलाओं ने लोकगीत गाते हुए पूरे उत्साह के साथ पर्व की परंपराओं का निर्वहन किया।
गणगौर महापर्व राजस्थान और मालवा अंचल का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व माना जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन दांपत्य जीवन का प्रतीक है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से गणगौर की पूजा करती हैं।
16 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में महिलाएं प्रतिदिन गणगौर माता की पूजा, गीत-संगीत और पारंपरिक अनुष्ठानों के माध्यम से अपनी आस्था प्रकट करती हैं। पूरे शहर में इस आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल बना हुआ है।
