चंद्रग्रहण का असर: नीमच के मंदिरों में बंद रहे पट
नीमच। मंगलवार को लगे चंद्रग्रहण ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक आस्था और परंपराओं को पूरी तरह प्रभावित किया। ग्रहण के सूतक काल के चलते सुबह से ही सभी मंदिरों के पट बंद रहे। श्रद्धालु घरों में रहकर पूजा-पाठ, जप और भजन में लीन रहे, जबकि मंदिरों में नियमित दर्शन स्थगित रखे गए।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण से पहले ही प्रभावी हो जाता है। इस दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिरों में प्रत्यक्ष पूजा, भोग और आरती नहीं की जाती। इसी परंपरा का पालन करते हुए शहर के प्रमुख मंदिरों सहित छोटे-बड़े देवालयों के द्वार बंद रखे गए। मंदिर समितियों द्वारा पहले से ही श्रद्धालुओं को इस बारे में सूचना दे दी गई थी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण काल में भोजन और जल ग्रहण वर्जित माना जाता है, हालांकि बालक, वृद्ध और रोगी इस नियम से मुक्त हैं। कई परिवारों ने ग्रहण से पहले ही भोजन तैयार कर उसमें कुश (दूब) रख दिया था, ताकि वह शुद्ध बना रहे। दिनभर श्रद्धालु मंत्र-जप, रामनाम लेखन और धार्मिक पाठ में लीन रहे।
शाम लगभग 7 बजे ग्रहण का सूतक समाप्त होने के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मंदिर प्रांगण की साफ-सफाई, गंगाजल से छिड़काव और भगवान का अभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद ही श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के द्वार पुनः खोले जाएंगे। कई मंदिरों में रात्रि आरती भी विशेष रूप से आयोजित की जाएगी।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि ग्रहण काल में मानसिक जप और ध्यान करना अत्यंत फलदायी होता है। इसी कारण दिनभर मंदिरों में सन्नाटा रहा, लेकिन शाम के बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही फिर से शुरू होने की संभावना है। इस प्रकार चंद्रग्रहण के दौरान पूरे दिन धार्मिक अनुशासन और आस्था का वातावरण बना रहा, जो शाम को शुद्धिकरण और पूजा-अर्चना के साथ पुनः सामान्य स्थिति में लौटेगा।
