भगवान प्रेम के भूखे हैं, धन के नहीं — रमाकांत गोस्वामी महाराज

  नीमच
  न्यूज डेस्क
  26 December, 2025
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नीमच। श्रीमद् भागवत की कथा में श्रीकृष्ण की माखन लीला केवल बाल-चंचलता नहीं, बल्कि गोपियों के निश्छल प्रेम को स्वीकार करने का प्रतीक है। भगवान औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि शुद्ध हृदय से उपजा प्रेम स्वीकार करते हैं। यह बात वृंदावन धाम मथुरा के प्रख्यात श्रीमद् भागवत आचार्य संत श्री रमाकांत गोस्वामी जी महाराज ने कही।
वे सिंहल परिवार द्वारा कमल अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज जाति भेद भूलकर संगठित रहे, तो राष्ट्र और अधिक शक्तिशाली बन सकता है। भगवान कृष्ण, ब्रह्मांड के अधिपति होते हुए भी, माता यशोदा के वात्सल्य में बंधे रहे—यह मां और संतान के निस्वार्थ प्रेम का अनुपम संदेश है।
महाराज श्री ने कहा कि वृंदावन भक्ति का आधार है। कृष्ण ने भक्तों के प्रेमवश जीवन भर वृंदावन न छोड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने बच्चों को जीवन में आत्मनिर्भर और कर्मशील बनने की प्रेरणा दी तथा कहा कि अभ्यास से ही प्रतिभा निखरती है।
कथा के दौरान माखन लीला प्रसंग पर पंडाल भक्ति और उल्लास से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बालकृष्ण पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा का आयोजन 22 से 28 दिसंबर, प्रतिदिन दोपहर 2 से 6 बजे तक किया जा रहा है।