डेस्क न्यूज
09 June, 2026
राजनीति
भाजपा की आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला, कांग्रेस ने आरोपों को बताया निराधार; विधायकों को बेंगलुरु भेजने की तैयारी
भोपाल। मध्यप्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज कर दिया गया है। भाजपा की ओर से नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद जांच के उपरांत यह निर्णय लिया गया।
भाजपा का आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नामांकन पत्र में प्रस्तुत नहीं की। इस संबंध में रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। जवाब और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद नामांकन निरस्त कर दिया गया।
हालांकि कांग्रेस ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें केवल एक न्यायालयीन नोटिस प्राप्त हुआ था, जिसे गलत तरीके से विवाद का विषय बनाया गया है।
नामांकन पत्रों की जांच के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे की स्थिति बनी रही। इस दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और विक्रांत भूरिया ने रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस एवं विधानसभा सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया।
इधर राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक गतिविधियों के बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजने का फैसला किया है। जानकारी के अनुसार कांग्रेस की चार्टर्ड फ्लाइट में 38 विधायक सहित लगभग 75 लोग बेंगलुरु रवाना हुए हैं, जबकि शेष विधायकों को दूसरी उड़ान से भेजने की तैयारी की गई है।
फ्लाइट को लेकर भी विवाद सामने आया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भोपाल एयरपोर्ट पर उनकी चार्टर्ड फ्लाइट को उड़ान की अनुमति देने में अनावश्यक देरी की गई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में विमान को रोका गया, जबकि एयरपोर्ट प्रशासन ने तकनीकी और अनुमति संबंधी कारणों का हवाला दिया।
मध्यप्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर अब राजनीतिक संघर्ष और तेज हो गया है। एक ओर कांग्रेस नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर विधायकों की निगरानी और राजनीतिक जोड़-तोड़ की आशंकाओं के बीच सियासी माहौल बेहद गर्म हो गया है।